इस बढ़ते समय के साथ, कुछ यादें थम-सी जाती हैं,
बचपन की वो हंसी, कहीं दिल में ही छुपी रह जाती हैं।
कुछ बातों में अब भी झलकती है वो प्यारी-सी नादानी,
चाहे वक्त बदल जाए, पर नहीं जाती मासूमियत पुरानी।।
जिसको ना कह कर भी सभी बातें बोल दी जाती हैं,
खामोशी में भी जिससे गहरी बातें खोल दी जाती हैं।।
जिसकी आँखों में झलकता है दिल का हर अफसाना,
उन्हीं के साथ होती है पूरी दोस्ती की हर अधूरी दास्तां।।
जिसके संग बचपन न जिया,अब संग बचपन बुन रहे हैं, वक्त के उलट सफर में, रोज नए-नए सपने चुन रहे हैं।। तब हो जाती हैं यादें ताज़ा उस सुनहरे बचपन की, जब होती हैं उनसे गुफ़्तगू थोड़ी- सी अपनेपन की ।।
उनकी हंसी में झलकता है, वो बीता हुआ ज़माना,
जैसे मिल गया हो खोया हुआ खज़ाना।।
दिल चाहता है ये पल बस यहीं ठहर जाए,
और ये अधूरा किस्सा अब मुकम्मल हो जाए।।
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