लेखक परिचय

डॉ० गोपल कृष्णा, जिनका जन्म 18 मई 1991 को हुआ, एक प्रतिभाशाली और संवेदनशील व्यक्ति हैं। कर्क राशि के प्रभाव से उनमें भावनात्मक गहराई और स्नेह की प्रचुरता देखने को मिलती है। उनका बचपन बुलंदशहर में बीता, जहाँ उन्होंने साइकिलिंग, बारिश में भीगने, और कागज की नावों से खेलते हुए जीवन के सरलतम पलों का आनंद लिया। 

शिक्षा के क्षेत्र में, गोपाल ने कंप्यूटर विज्ञान में एम.टेक, पी० एच० डी० की हैं और वर्तमान में वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान कर रहे हैं । उनकी पीएच०डी० भी  ऊर्जा उत्पादन और प्रबंधन में AI और IoT के अनुप्रयोगों पर केंद्रित है। उन्होंने कई शोध-पत्र प्रकाशित किए हैं, जो प्रतिष्ठित साइंस सिटेशन इंडेक्स (SCI) में सूचीबद्ध हैं, और उनके काम ने इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। 

विविध भाषाओं में दक्ष, गोपाल हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी, पंजाबी बोल सकते हैं तथा गढ़वाली बोलना सीखने के लिए प्रयासरत हैं । उनका विशेष लगाव हिन्दी भाषा से है, और वे हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए सतत प्रयासरत रहते हैं। वह एक उत्साही लेखक भी हैं, और "बुनते ख़्वाब" नाम से उनकी सभी हिन्दी रचनाएँ उनके ब्लॉग https://writtergkrishna.blogspot.com पर पाठन हेतु उपलब्ध हैं। उनके लेखन में गहरी संवेदनाएँ, जीवन के उतार-चढ़ाव, और सामाजिक मुद्दों की झलक मिलती है। साहित्य और शास्त्रीय संगीत में उनकी गहरी रुचि है। वे शास्त्रीय संगीत के प्रशंसक हैं, और संगीत में साहित्यिक गहराई तथा भावनात्मक अभिव्यक्ति का महत्व समझते हैं।

गोपल कृष्णा का जीवन दर्शन प्रेम पर आधारित है। उनका मानना है कि प्रेम के लिए जीवन पर्याप्त नहीं होता, जबकि  घृणा के लिए इसमें कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उनके मित्र कम किन्तु ह्रदय से जुड़े हुए हैं जिनको वे अपने जीवन में कभी अपने से अलग नहीं होने देना चाहते। राजनीतिक चर्चा में उनकी रुचि है, लेकिन वे राजनीतिज्ञों से निराश हैं जो देश की प्रगति में बाधा डालते हैं। ब्लॉग लेखन और फ़ोटोग्राफी का शौक उनके व्यक्तित्व को और समृद्ध बनाता है। 

गोपल का मानना है कि अनुभव ही सबसे बड़ा शिक्षक है और विश्वास दुनिया की सबसे कीमती वस्तु है। यही दृष्टिकोण उन्हें जीवन के हर पहलू में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।


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