हाथ थामे रखना आता है मुझको



आप करो तो गुस्सा ... मैं झेल लूंगा ।
आप डांटना मुझको ... मैं सह लूंगा ।।
मेरा हक नहीं तेज़ बोलने का भी ... .. .
दिया है हक मुझको बस प्यार करने का ||

गुलाब जैसे फूल को सहेजने के लिए...
मैं इन कांटों को भी सह लूंगा ।।
और अगर चुप भी हो जाओगे तो ...
बस रातों - रातों जी भर रो लूंगा ।।

तुम्हें तुमसे ज़्यादा काबिल बनाना है ,
वो एक जुनून ही तो था मेरा।
और जब कोई न हो पास तुम्हारे,
तब भी महसूस करोगे दिल से साथ मेरा ।

और मैं जानता हूँ कि ये कोई कर्ज़ नहीं पर ,
मानता हूँ अपना तो फिर ये फ़र्ज़ ही तो है मेरा।
और ऐसी स्थिति में भी ,नकली का मुस्कुरा रहा हूँ ,
जानती हो बुद्धू राम को, अन्दर से टूटा जा रहा हूँ ।।

तूफ़ानों में भी संभाल लूंगा तुम्हें ..
आपको सम्हालना आता है मुझको ||
चाहें आप कितना भी परख लेना ..
हाथ थामे रखना आता है मुझको ||

आप मेरी सुनते हो, मैं आपकी सुनता हूँ,
फैसले भी हम हमेशा साथ लिया करते हैं।
पर कभी-कभी जब आप अकेले सोचते हैं,
वो खामोश पल... मुझे अधीर करते हैं। 

कुछ रिश्ते लफ़्ज़ों से नहीं, एहसासों से बने होते हैं,
दूरी के बावजूद भी ये दिल के पास बने होते हैं।
अनंत भरोसा है आप पर , ये एहसास अधूरा नहीं,
जानता हूँ आपको आप 💛 भी कभी मुझसे 🍊 दूर नहीं ।।



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