खामोशी पढ़ना

थोड़ा रुक जा, थोड़ा सा थम ज़रा ,

दिन के शोर में खुद को सुन ज़रा |

काम तो कल भी होगा जरूर पर,

आज के लिए बस चैन तू चुन ज़रा ||


आँखों में हल्की सी थकान का नशा,

दिल के कोने में एक छुपी-सी आशा |

मैं यहां हूं, साथ हूँ बस इतना याद रखना ,

तेरे हर सांस में हूं एक छाया सा सखा ||


जब तू थक जाए, तो सिर झुका लेना,

मेरे खामोश कंधे को तकिया बना लेना।

मैं कुछ कहूंगा नहीं, बस वहीं रहूंगा,

तेरी ख़ामोशी में भी तुझे पढ़ता रहूंगा।


हर बार खामोशी पढ़ना आसान नहीं होता सच है  ,

एक बात दिल से कहूं - थोड़ा सा बता दिया कर |

नज़रें मिला लिया कर जब न दें साथ लफ्ज  ,

तेरे हर पल में रहूं बस , इतना सा हक दिया कर।


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