खामोशी की भाषा


कही भी नहीं गई ऐसी कोई बात,
पर हाँ कह दी गई, अब हर बात ।
या तो सिखा दे कोई शब्दों का जादू,
या ख़ामोशी से कही जाए वो बात ।।

जब लफ़्ज़ों की मूरत न बने कुछ,
तो दिल में बसी हो एक सच्ची राहत।
हर एहसास शब्दों में नहीं बंधपाता,
जब मन में बसी हो कोई गहरी चाहत ।

-- गोपाल कृष्णा  |

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