डर ख़ामोशी से लगता है, लफ्जों से नहीं,
जो कह न सके, उस दर्द से सही।
जो अनकहा रह जाए, वही चुभता है,
दिल के भीतर ही भीतर कुछ टूटता है।
छलक आते हैं आँसू, मगर वजह नहीं कहते,
दिल की बेचैनियों को कभी लफ्ज़ नहीं देते।
जो दर्द छुपा लिया, वही गहरा होता है,
हर खामोशी में एक किस्सा बयां होता है।
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