तेरे साथ का सुकून


छिपाना तो चाहते हैं, मगर अपनों से छुपाएँ कैसे,
दिल की आवाज़ को आखिर दीवारों से बचाएं कैसे...
कभी-कभी यूँ ही, खामोशी से खुद में बिखर जाते हैं,
अपने ही सवालों की गिरफ़्त में बेबस उलझ जाते हैं...
कभी लगता है कि हाल-ए-दिल समझाएं कैसे,
तो कभी लगता है ख़ुद से ही खुद को बचाएँ कैसे...


इस तेज़ रफ़्तार दुनिया में, सुकून का ठिकाना नहीं,
जो दे सुकून चंद पलों में, उससे बढ़कर खज़ाना नहीं।
थामे रखना वो हाथ उम्र भर, जो थामे हाथ तन्हाई में,
जो निभाए साया जैसे, ये फ़साना अब सुनाना नहीं।।


मुश्किलों को आपके करीब आने नहीं देंगे,
हर पल आपकी खुशी की दुआ करते रहेंगे।
अपनों के सामने अपने दिल का हाल बयां करते हैं न...
और जब आंखें भी न बोले, तब धड़कन से पढ़ लेंगे।।


देख रहा हूँ मैं आज कल ...
कुछ बातें बताने लगे हो आप ..
शायद आपको पता चल गया है अब ...
मुझको बोलने से अच्छा सुनना लगता है ..

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