छांव सी दोस्त

इस दोस्ती के लिए दिल में कब्रिस्तान बसाया है मेरी दोस्त ने,
जहाँ मेरी हर गलती को बिना शिकायत दफनाया है मेरी दोस्त ने।

ना ताने, ना उलाहने... बस खामोशी से सब सह जाती है,
बस मुस्का कर मेरी गलती को अपनी गलती कह जाती है।

वो दर्द में भी मेरा हौसला बन जाती है,
खुद टूटी होती है पर मेरे लिए दीवार बन जाती है।

हर दुआ में मेरा नाम पहले रखती है,
अपनी खुशी से ज़्यादा मेरी हँसी की फ़िक्र करती है।

अगर रिश्ता कोई खुदा के बाद सबसे पाक है,
तो वो मेरी इस दोस्ती का नाम है जो हर हाल में मेरे साथ है।


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