( अब वो रेशम को लेकर अनूप से मिलने चल दिया | अनूप के पास पहुँच कर अनूप को सारी स्थिति बताई तथा अपने होने वाले बच्चे तथा रेशम को अपनाने के लिये कहा | लेखिन अनूप इस बात के लिये तैयार नहीं हुआ तथा बहाने बनाने लगा | तभी वरुण ने मनोज को फोन किया और मनोज इत्तेफाक से उसी शहर किसी कार्य से आया हुआ था | मनोज ने कहा कि १० मिनट इंतजार करो मै अभी तुम्हारे पास आ रहा हूँ | १० मिनट बाद एक पुलिस की जीप अनूप के घर के आगे रुकी | और उसमे से एक इंस्पेक्टर मनोज ६ कांस्टेबल के साथ जीप से उतर कर घर की तारा बढ़ने लगे | उनको देख कर अनूप की सासें उखाड़ने लगी | और फिर इंस्पेक्टर मनोज दनदनाते हुए बैठक में घुस गए | इंस्पेक्टर मनोज ने वरुण से गर्म जोशी से हाथ मिलाया और बोले बताओ क्या मामला है | )
- - - - इस कहानी से
नोट उडाये जा रहे है | रंगीली नाच रही है | छम-छम कर घुंघरू पैरों में बज रहे है | चारों ओर वाह-वाह हो रही है | रंगीली फरहा मौसी के कोठे की सबसे सुन्दर और अदाकार कलाकार है या यूँ समझिए कि कोठा ही रंगीली के नाम से चलता है | रंगीली नहीं तो कोठा नहीं | रंगीली न नाचे तो न कोई नाच गाना देखने आनेवाला |
एक तरफ तो महफिल जम हुई है वहीँ दूसरी तरफ दूसरी तरफ कुछ गम के मारे और कुछ पीने के शौकीन बैठे हैं गोल मेज के चारों ओर और वेटर से दारू और बियर की मांग कर रहे है | कुछ शान्ति-सी है यहाँ |
सुबह कोई नहीं कह सकता कि ये कोठा है | लगता है गर्ल्स हास्टल है | एकदम सादा सच्चा-सा जीवन है | कोई चोटी बना रही है तो कोई कपड़े धो रही है | कोई सब्जी काट रही है कोई कपड़े सुखा रही है | मौसी पान चबा रही है और लड़ रही रूही और रूबी को डाट रही है | रात पहने उत्तेजक कपड़े और सब कुछ और सुबह तो ऐसा कुछ नहीं | सदा-सा सलवार कमीज |
अभी शाम को वर्दी में एक नया पुलिस वाला वहाँ पर नजर आया | मौसी को इस बात की सूचना दी गयी | पता चला कि नयी पोस्टिंग है इस काला बाजार में | मौसी ने शागिर्द को भेज दिया उसकी जन्म कुण्डली निकलवाने के लिये | पता चला कि वो तो बण्डल की पूजा करता है और नर्कामृत ( शराब ) सेवन करता है | फिर क्या था मौसी के एक इशारे पर वो मौसी का गुलाम हो गया | रोज सलाम ठोकता | और बहुत-सी चेलियों से उसकी जान पहचान तथा आना जाना हो गया |
अगले दिन पुलिस वाले के साथ एक सुन्दर नवयुवक था | उसको वो समझा रहा था कि वो एक ईमानदार पुलिस है | तब ही तो इस स्थान पर उसको नियुक्त किया गया है | लड़का पुलिस वाले का बचपन का दोस्त था | इतने में ही एक सुन्दर सी लड़की आई और उस युवक से बोली ," तू मेरे को कोल्ड ड्रिंक पिलवा रहा है या मै तेरे को पिलवाऊ ???"
युवक सहमा-सा बोला, "आप ही पी लिजिये |" तब वो लड़की बोली कि चाचा दो कोल्ड ड्रिंक देना | एक लड़के के हाथ में दे दी और एक खुद पीने लगी | इतना में युवक चलता बना और पुलिस वाले से बोला क्या ड्रामा है ये ???
पुलिस वाला बोला वरुण तू एक नंबर का घोंचू है | अप्सरा तेरे पास आई और तू पत्ता काट कर आ गया |कोई बात नहीं ... बचपने में होता है कभी कभी | ये रंगीली है जो ना तो आज तक किसी के पास सोई न आसानी से जाती | और तेरे पास आई तू पागलपनती कर वहाँ से खिसक लिया |
वरुण पूरा दिन अपना व्यापार देखता और उसके बाद शाम को समय व्यतीत करने गपशप करने अपने पुलिस वाले बचपन दोस्त मनोज के पास चला जाता | दो तीन दिन भी नहीं बीते ये रंगीली फिर आ धमकी | बोली ," कैसा है रे तू ??" वरुण ने बोला , "मै ठीक हूँ आप कैसे हो ???"
उसे पता नहीं क्या हुआ बहुत खुश-सी हो गयी | कहा चाचा मेरे वाले दो पान लगवाना | वो बोले अभी लगवाता हूँ मेमसाहब | एक पान खुद मुह में रख कर बोली तेरा नाम क्या है ??? वो बोला मेरा नाम वरुण है | और तू क्यों है इस काला बाजार में ... तेरी अभी तक व्यवस्था नहीं हुई ???वरुण ने कहा कि मै तो अपने दोस्त के साथ कुछ देर गपशप करने आता हूँ | फिर चला जाता हूँ |"
"हर कोई ऐसा नहीं होता जैसा पहली नजर में सोच लिया जाता है |"बस इतनी ही तो बात हुई थी उस अँधेरे से में ........ |वो इतना कहकर चला गया | और रंगीली देखती रह गयी |मौसी मनोज को बुलाती है और पता नहीं क्या धंधे की बातें करती है |
अगले दिन स्काइप कोलिंग करते वरुण के फोन पर किसी का मेसेज आता है , हेल्लो वरुण |वरुण अपनी बचपन की दोस्त रेशम से बात कर रहा था |वो भी पूँछ पड़ी किस का मेसेज है ,.... आखिर महीनों में तो बातें होती थी रेशम से | उसने कहा पता नहीं किसका है और फोन साइलेंट पर कर दिया | कोई नहीं जी बातें खतम हुई | फोन पर देखा अंतिम सन्देश था यू देयर ???
ऑफिस का कार्य तो समाप्त हो ही गया था ... वरुण ने कहा हाँजी | आप कौन हो ?? रिप्लाई आया अक्षरा |अक्षरा मै तो किसी अक्षरा को नहीं जानता | मेसेज आया कि रंगीली को तो जानते हो ना | ...वरुण को याद आया हाँ ये तो वही है काला बाजार की सुंदर-सी लड़की |उसने कहा कि मेरा नंबर कहाँ से मिला ?? तो बोली कि पुलिस वाले से ............बहुत गुस्सा आया साले मनोज पर "मेरा नंबर एक नर्तकी को दे दिया "|
तुम भी क्या मेरे को ऐसा समझते हो ??? वरुण ने कहा कि इस में समझने की क्या बात है ???उसने याद दिलाया ..... तुमने ही कहा था "हर कोई ऐसा नहीं होता जैसा पहली नजर में सोच लिया जाता है "| उसको भी अपनी गलती-सी लगी | वरुण ने कहा , " मै व्यस्त हूँ ठीक है | बाद ने बात करता हूँ |"
कोई बात नहीं शाम होते ही पहुँच गया अपने दोस्त के पास .. और बोला मनोज बेटा तेरे से एसी उम्मीद नहीं थी | मनोज बोलता है कि एक तो तेरी सेटिंग करा दी ऊपर से ऐसा और सुनने को मिल रहा है | तू साले है ही हमेशा से ऐसा | पर वो है कहाँ ?? ... मुझको क्या पता मनोज ने कहा |मनोज अपने काम में लग गया और वरुण अपने काम में लग गया | दो तीन दिन भी नहीं पता चला कुछ उसका |
एक दोपहर को फोन बजा ... कॉल थी ... उठाते ही आवाज आई "वरुण मेरी याद नहीं आई तुमको हम्म " एक प्यारी सी आवाज आई उधर की तरफ से | आवाज समझ में आ रही थी | नंबर देखते ही समाझ आ गया कि ये रंगीली ही थी | फिर भी वरुण बोला ,"कौन है ??"
तो आवाज आई "इस नम्बर को सेव कर लों मै अक्षरा हूँ | कैसे हो ???" वरुण से कुछ बातें हुई ... वरुण से मित्रता प्रस्ताव रखा | अपनी बात को रखते हुए वरुण ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया |
अब अक्सर उनकी बातें होने लगी | थोड़ी बहुत बातें करने में परेशानी ही क्या थी ??? पर लगता था जैसे अक्षरा को एक तरफा प्यार होने लगा था | दोस्ती धीरे धीरे गहराने लगी पर वरुण अभी भी कुछ परेशान-सा था |
एक दिन वरुण ने कहा कि मै तुमसे मिलना चाहता हूँ | अक्षरा बोली कि आजाओ काला बाजार बहुत दिनों से आये भी नहीं हो | वरुण ने कहा नहीं अब मनोज का भी ट्रांसफर हो गया है मै आ कर क्या करूँगा | दोनों ने मिलकर एक समंदर किनारे रेस्तरां में मिलने का विचार किया |
अक्षरा बुर्खा पहन कर आई थी | बहुत सुन्दर लग रही थी वो | बातों का दौर शुरू हुआ , कुछ खाया-पिया फिर अँधेरे के साथ वो चल दिए समंदर किनारे घूमने | वहाँ पर वरुण कहता है कि बुरा ना मनो तो एक बात पूँछ सकता हूँ | अक्षरा बोलती है हम दोस्त है इस में पूंछना कैसा ? पूँछ लों यार | तब वरुण कहता है , "तुम ऐसा काम क्यों करते हो ???"
अक्षरा पहले तो चुप हो गयी फिर बोली , "तुमको क्या लगता है मै क्यों करती हूँ इस काम को ? जब मै छोटी थी तो मेरे सोतेले मोसा ने मेरे को बेच दिया था और मेरे को तो कुछ पता नहीं था ...... ना मैंने माँ देखी ना बाप | मै यहीं नाचती गाती बढ़ी हुई हूँ | अभी ही नाचती हूँ | और नाचती हूँ ... सब मेरे को ऐसी ही नजर से देखते हैं .. क्या मै लड़की नहीं हूँ ..... क्या मेरे दिल नहीं है ??? क्या वो पत्थर है जो कभी धड़कता नहीं है | आज तक मै किसी के साथ नहीं सोई |
क्या मेरा मन नहीं करता कि मेरा बॉय फ्रेंड हो ..... क्या मेरा मन नहीं करता कि मै उस कोठरी से निकल कर कभी बहार नीले आसमान के नीचे अपने प्रेमी के साथ घूंमू | तुम मेरे को अच्छे लगे और तुम्हारे विचार भी शालीन थे | तुमने मेरे को एक लड़की की तरह देखा न कि नाचने वाली की तरह | तुम सच में देवता हो मेरे लिये |"
और फफक कर वरुण की छाती से चिपक कर रोने लगी | वरुण की आँखों में आंसू आ चुके थे |
वरुण बोला मै हूँ ना तुम्हारा दोस्त .... मत रो प्लीज़ |किसी तरह वरुण ने अक्षरा को चुप कराया और फिर उसको बाजार की ओर छोड कर घर चला गया |
मुलाकातों का दौर बढ़ता चला गया | अब इतनी मुलाकातों में वरुण भी अक्षरा को ठीक से समझ चुका था | एक दिन वरुण अक्षरा से बोला कि मेरे पास एक खबर है | अक्षर बोली वो क्या ??? वरुण कहता है कि मेरी शादी पक्की हो गयी है | लड़की का नाम रेशम है |
अक्षरा सन्न रह गयी | जैसे छाती में से किसी ने दिल को निकल लिया हो | आंसू पोंछते हुए बोली बधाई हो | साफ पता चल रहा था कि अक्षरा वरुण को चाहने लगी थी | वरुण भी रुआ सा हो उठा .. लग रहा था वो भी अक्षरा के चाहने लगा था | उसकी दोस्त से जाने रिश्ता रहता उसका शादी के बाद जाने ना | वरुण बताता है कि उसको शादी तथा व्यापार के सिलसिले से बहार भी जाना है करीब ४ महीनों में लोटेगा | अब तो अक्षरा उठी और बस चल दी वरुण आवाज देता रह गया |
कुछ दिन बाद वरुण की शादी थी | अक्षरा को फोन मिला मिला कर थक गया था फोन लग ही नहीं रहा था |उसने मनोज को इस मेसेज भेजा कि अक्षरा को मेरी शादी के बारे में बता देना | रिप्लाई आया कि मै तो जम्मू में हूँ बस तेरी शादी के दिन आऊंगा पर ये अक्षरा कौन है ? वरुण बोला वो रंगीली ..... मनोज को कुछ पता तो था नहीं ... उसको सवालों की झड़ी लगने से पहले उसने कहा अभी बाद में तेरे को सब बताता हूँ |
मनोज बोला तू चिन्ता ना कर तेरा काम करवा दूँगा | अहसानमंद रहूँगा , ऐसा कहकर वरुण ने फोन रख दिया | मनोज ने मौसी से कह कर रंगीली तक ये बात पहुंचा दी | रंगीली शादी में आई और शुभकामनायें दे कर चली गयी |
अब मनोज को शादी के कुछ समय बाद पता चालता है कि रेशम के गर्भ में जो बच्चा है वो उसका नहीं , ना वो उसको प्यार करती | वरुण पागल-सा हो गया | उसको कुछ समझ में नहीं आ रहा था ... कि करे क्या और क्या करे ???
उसको अपने मित्र मनोज की याद आई | उसने मनोज को कॉल कर सारी बातें बताई | मनोज ने कुछ कुछ सलाह दी कि रेशम से उसके बॉय फ्रेंड के बारे में पूंछे | रेशम से बहुत प्यार से विश्वास में ले कर रेशम से पूंछा और उसने अपने बॉय फ्रेंड का नाम अनूप बता दिया |
अब वो रेशम को लेकर अनूप से मिलने चल दिया | अनूप के पास पहुँच कर अनूप को सारी स्थिति बताई तथा अपने होने वाले बच्चे तथा रेशम को अपनाने के लिये कहा | लेकिन अनूप इस बात के लिये तैयार नहीं हुआ तथा बहाने बनाने लगा |तभी वरुण ने मनोज को फोन किया और मनोज इत्तेफाक से उसी शहर किसी कार्य से आया हुआ था | मनोज ने कहा कि १० मिनट इंतजार करो मै अभी तुम्हारे पास आ रहा हूँ |
१० मिनट बाद एक पुलिस की जीप अनूप के घर के आगे रुकी | और उसमे से एक इंस्पेक्टर मनोज ६ कांस्टेबल के साथ जीप से उतर कर घर की तरफ बढ़ने लगे | उनको देख कर अनूप की सासें उखाड़ने लगी | और फिर इंस्पेक्टर मनोज दनदनाते हुए बैठक में घुस गए | इंस्पेक्टर मनोज ने वरुण से गर्म जोशी से हाथ मिलाया और बोले बताओ क्या मामला है |
वरुण ने सारी बातें मनोज को कह सुनाई | मनोज ने अनूप को कानूनी और पुलिसिया भाषा दोनों में समझाया | थोड़े प्रयास के बाद अनूप ने वरुण से माफ़ी मांगी और रेशम को स्वीकार करने के लिये राजी हो गया | और मनोज के साथ वरुण अपने घर वापस आ गया |
मनोज ने वरुण से अक्षरा के विषय में पूँछा | वरुण ने बताया हम अंतिम समय शादी में मिले थे | मनोज उसको ले कर काला बाजार चल दिया और सीधा मौसी के पास पहुंचा | वरुण थोडा हिचकिचा रहा था परन्तु मनोज के साहस बंधाने पर वो चल दिया |
मौसी बैठी पान चबा रही थी | मनोज को देखते ही बोली , "क्या इंस्पेक्टर बाबू !!!!!!! तुम जम्मू क्या चले गए हमको तो भूल ही गए|"
मनोज मौके को सम्हालते हुए बोला ," ऐसी कोई बात नहीं है मौसी .. कैसे हो .... मिलता तो रहता था समय समय पर मेरा सन्देश | अब भी तो आया हूँ आपके पास और हँस पड़ा |"
मनोज ने मौसी से रंगीली के बारे में पूंछा | तो मौसी ने बताया कि जब से वरुण की शादी से आई है मेरा तो कोठा जैसे चलना ही बंद हो गया है | जाने कौन है ये वरुण | जब से आई है उसी रात से ना सोती है | ना कुछ खाती है , कभी खा लिया तो खा लिया ... उसकी एक थिरकन पर महफिल में सब वाह-वाह कर उठते थे अब वो ही रंगीली फीकी और सूख कर कांटा हो गयी है | जाने कितना समझाया उसको पर वो है कि समझने को तैयार ही नहीं | बस रोती रहती है |
इशारा कर के बोली "ये साथ में कौन है " ? कुछ खातिरदारी या व्यवस्था करवाऊ ??
"वरुण है"सुनते ही मौसी थोडा-कड़की थोडा-भडकी और बस मन मसोसकर रह गयी | और मनोज बोला इसको रंगीली से मिलना है | रूबी को बुला कर कमरे में भेज दिया | साथ ही पीछे मनोज और मौसी भी आ खड़े हुए |
रंगीली वरुण को देखा और अनदेखा सा कर के बैठ गयी |
वरुण ने बोला : "अक्षरा"| कोई जबाब नहीं आया | वरुण ने फिर से बोला : अक्षरा |
आवाज आई "यहाँ कोई अक्षरा नहीं है |" और रंगीली ......... "रंगीली वो नाचने वाली ............ वो तो आपसे मिलने के बाद ही खत्म हो गयी थी | तब से घुंघरुओं को हाथ तक नहीं लगाया है वरुण | "
अक्षरा क्यों नहीं है ? ??वरुण ने कहा |
"जब आप मेरे नहीं तो अक्षरा नहीं |अक्षरा को कोई नहीं जानता था .. सिवाय आपके ....रंगीली को अक्षरा बनाने का श्रेय जाता है तो सिर्फ आप को |"
वो बोली , "आपके साथ घूमना फिरना , मस्ती वो कुल्फी खाना और वो एक एक पल जो आपके साथ गुजर था .. उसकी को याद कर मै आज तक जी रही थी | इतना प्यार था और उसी प्यार पर विश्वास कि आप एक दिन जरूर आओगे | पर मेरे को ये भी पता था कि शादी होने के बाद आप किसी नाचने वाली के साथ क्यों घूमोगे " ....... और इतना कहते ही वो रो पड़ी |
"एक मुजरे में नाचने वाली लड़की की जिन्दगी को किस कदर आपने बदल दिया आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं | अब मेरे को अकेला छोड दीजिए |"
"यहाँ इस तरह घुट-घुट कर जीने को ???" वरुण बोला |
अक्षरा ने कहा , "उस से आपको क्या वरुण मै कैसे भी रहूँ |"
"तुमने पहले क्यों नहीं बताया ये सब कुछ चल रहा था तुम्हारे जहन में ", वरुण ने कहा |
"कुछ भी बताने से पहले तुमने अपनी शादी की खबर जो दे दी थी | बता कर भी क्या होता ? तुम एक सफल बिजनिस-मेन हो | क्या किसी कोठे पर मुजरों में नाचने वाली लड़की से शादी करते ???" रूआंसी अक्षरा बोली |
अपने को सम्हाल कर बहुत हिममत कर के अक्षरा बोली भाभी कैसी है ? मनोज बोला , " हम उनको उनके घर हमेशा के लिये छोड आयें हैं | "
वरुण ने कहा , "क्या तुम मेरे साथ चलोगी ???" प्यारी-सी मुस्कान-स्वीकृति देख वरुण ने अक्षरा को ह्रदय से लगा लिया |
मौसी भी खड़े-खड़े देख रही थी | मनोज और मौसी के चेहरे पर भी सुकून के भाव थे |
- - - - इस कहानी से
नोट उडाये जा रहे है | रंगीली नाच रही है | छम-छम कर घुंघरू पैरों में बज रहे है | चारों ओर वाह-वाह हो रही है | रंगीली फरहा मौसी के कोठे की सबसे सुन्दर और अदाकार कलाकार है या यूँ समझिए कि कोठा ही रंगीली के नाम से चलता है | रंगीली नहीं तो कोठा नहीं | रंगीली न नाचे तो न कोई नाच गाना देखने आनेवाला |
एक तरफ तो महफिल जम हुई है वहीँ दूसरी तरफ दूसरी तरफ कुछ गम के मारे और कुछ पीने के शौकीन बैठे हैं गोल मेज के चारों ओर और वेटर से दारू और बियर की मांग कर रहे है | कुछ शान्ति-सी है यहाँ |
सुबह कोई नहीं कह सकता कि ये कोठा है | लगता है गर्ल्स हास्टल है | एकदम सादा सच्चा-सा जीवन है | कोई चोटी बना रही है तो कोई कपड़े धो रही है | कोई सब्जी काट रही है कोई कपड़े सुखा रही है | मौसी पान चबा रही है और लड़ रही रूही और रूबी को डाट रही है | रात पहने उत्तेजक कपड़े और सब कुछ और सुबह तो ऐसा कुछ नहीं | सदा-सा सलवार कमीज |
अभी शाम को वर्दी में एक नया पुलिस वाला वहाँ पर नजर आया | मौसी को इस बात की सूचना दी गयी | पता चला कि नयी पोस्टिंग है इस काला बाजार में | मौसी ने शागिर्द को भेज दिया उसकी जन्म कुण्डली निकलवाने के लिये | पता चला कि वो तो बण्डल की पूजा करता है और नर्कामृत ( शराब ) सेवन करता है | फिर क्या था मौसी के एक इशारे पर वो मौसी का गुलाम हो गया | रोज सलाम ठोकता | और बहुत-सी चेलियों से उसकी जान पहचान तथा आना जाना हो गया |
अगले दिन पुलिस वाले के साथ एक सुन्दर नवयुवक था | उसको वो समझा रहा था कि वो एक ईमानदार पुलिस है | तब ही तो इस स्थान पर उसको नियुक्त किया गया है | लड़का पुलिस वाले का बचपन का दोस्त था | इतने में ही एक सुन्दर सी लड़की आई और उस युवक से बोली ," तू मेरे को कोल्ड ड्रिंक पिलवा रहा है या मै तेरे को पिलवाऊ ???"
युवक सहमा-सा बोला, "आप ही पी लिजिये |" तब वो लड़की बोली कि चाचा दो कोल्ड ड्रिंक देना | एक लड़के के हाथ में दे दी और एक खुद पीने लगी | इतना में युवक चलता बना और पुलिस वाले से बोला क्या ड्रामा है ये ???
पुलिस वाला बोला वरुण तू एक नंबर का घोंचू है | अप्सरा तेरे पास आई और तू पत्ता काट कर आ गया |कोई बात नहीं ... बचपने में होता है कभी कभी | ये रंगीली है जो ना तो आज तक किसी के पास सोई न आसानी से जाती | और तेरे पास आई तू पागलपनती कर वहाँ से खिसक लिया |
वरुण पूरा दिन अपना व्यापार देखता और उसके बाद शाम को समय व्यतीत करने गपशप करने अपने पुलिस वाले बचपन दोस्त मनोज के पास चला जाता | दो तीन दिन भी नहीं बीते ये रंगीली फिर आ धमकी | बोली ," कैसा है रे तू ??" वरुण ने बोला , "मै ठीक हूँ आप कैसे हो ???"
उसे पता नहीं क्या हुआ बहुत खुश-सी हो गयी | कहा चाचा मेरे वाले दो पान लगवाना | वो बोले अभी लगवाता हूँ मेमसाहब | एक पान खुद मुह में रख कर बोली तेरा नाम क्या है ??? वो बोला मेरा नाम वरुण है | और तू क्यों है इस काला बाजार में ... तेरी अभी तक व्यवस्था नहीं हुई ???वरुण ने कहा कि मै तो अपने दोस्त के साथ कुछ देर गपशप करने आता हूँ | फिर चला जाता हूँ |"
"हर कोई ऐसा नहीं होता जैसा पहली नजर में सोच लिया जाता है |"बस इतनी ही तो बात हुई थी उस अँधेरे से में ........ |वो इतना कहकर चला गया | और रंगीली देखती रह गयी |मौसी मनोज को बुलाती है और पता नहीं क्या धंधे की बातें करती है |
अगले दिन स्काइप कोलिंग करते वरुण के फोन पर किसी का मेसेज आता है , हेल्लो वरुण |वरुण अपनी बचपन की दोस्त रेशम से बात कर रहा था |वो भी पूँछ पड़ी किस का मेसेज है ,.... आखिर महीनों में तो बातें होती थी रेशम से | उसने कहा पता नहीं किसका है और फोन साइलेंट पर कर दिया | कोई नहीं जी बातें खतम हुई | फोन पर देखा अंतिम सन्देश था यू देयर ???
ऑफिस का कार्य तो समाप्त हो ही गया था ... वरुण ने कहा हाँजी | आप कौन हो ?? रिप्लाई आया अक्षरा |अक्षरा मै तो किसी अक्षरा को नहीं जानता | मेसेज आया कि रंगीली को तो जानते हो ना | ...वरुण को याद आया हाँ ये तो वही है काला बाजार की सुंदर-सी लड़की |उसने कहा कि मेरा नंबर कहाँ से मिला ?? तो बोली कि पुलिस वाले से ............बहुत गुस्सा आया साले मनोज पर "मेरा नंबर एक नर्तकी को दे दिया "|
तुम भी क्या मेरे को ऐसा समझते हो ??? वरुण ने कहा कि इस में समझने की क्या बात है ???उसने याद दिलाया ..... तुमने ही कहा था "हर कोई ऐसा नहीं होता जैसा पहली नजर में सोच लिया जाता है "| उसको भी अपनी गलती-सी लगी | वरुण ने कहा , " मै व्यस्त हूँ ठीक है | बाद ने बात करता हूँ |"
कोई बात नहीं शाम होते ही पहुँच गया अपने दोस्त के पास .. और बोला मनोज बेटा तेरे से एसी उम्मीद नहीं थी | मनोज बोलता है कि एक तो तेरी सेटिंग करा दी ऊपर से ऐसा और सुनने को मिल रहा है | तू साले है ही हमेशा से ऐसा | पर वो है कहाँ ?? ... मुझको क्या पता मनोज ने कहा |मनोज अपने काम में लग गया और वरुण अपने काम में लग गया | दो तीन दिन भी नहीं पता चला कुछ उसका |
एक दोपहर को फोन बजा ... कॉल थी ... उठाते ही आवाज आई "वरुण मेरी याद नहीं आई तुमको हम्म " एक प्यारी सी आवाज आई उधर की तरफ से | आवाज समझ में आ रही थी | नंबर देखते ही समाझ आ गया कि ये रंगीली ही थी | फिर भी वरुण बोला ,"कौन है ??"
तो आवाज आई "इस नम्बर को सेव कर लों मै अक्षरा हूँ | कैसे हो ???" वरुण से कुछ बातें हुई ... वरुण से मित्रता प्रस्ताव रखा | अपनी बात को रखते हुए वरुण ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया |
अब अक्सर उनकी बातें होने लगी | थोड़ी बहुत बातें करने में परेशानी ही क्या थी ??? पर लगता था जैसे अक्षरा को एक तरफा प्यार होने लगा था | दोस्ती धीरे धीरे गहराने लगी पर वरुण अभी भी कुछ परेशान-सा था |
एक दिन वरुण ने कहा कि मै तुमसे मिलना चाहता हूँ | अक्षरा बोली कि आजाओ काला बाजार बहुत दिनों से आये भी नहीं हो | वरुण ने कहा नहीं अब मनोज का भी ट्रांसफर हो गया है मै आ कर क्या करूँगा | दोनों ने मिलकर एक समंदर किनारे रेस्तरां में मिलने का विचार किया |
अक्षरा बुर्खा पहन कर आई थी | बहुत सुन्दर लग रही थी वो | बातों का दौर शुरू हुआ , कुछ खाया-पिया फिर अँधेरे के साथ वो चल दिए समंदर किनारे घूमने | वहाँ पर वरुण कहता है कि बुरा ना मनो तो एक बात पूँछ सकता हूँ | अक्षरा बोलती है हम दोस्त है इस में पूंछना कैसा ? पूँछ लों यार | तब वरुण कहता है , "तुम ऐसा काम क्यों करते हो ???"
अक्षरा पहले तो चुप हो गयी फिर बोली , "तुमको क्या लगता है मै क्यों करती हूँ इस काम को ? जब मै छोटी थी तो मेरे सोतेले मोसा ने मेरे को बेच दिया था और मेरे को तो कुछ पता नहीं था ...... ना मैंने माँ देखी ना बाप | मै यहीं नाचती गाती बढ़ी हुई हूँ | अभी ही नाचती हूँ | और नाचती हूँ ... सब मेरे को ऐसी ही नजर से देखते हैं .. क्या मै लड़की नहीं हूँ ..... क्या मेरे दिल नहीं है ??? क्या वो पत्थर है जो कभी धड़कता नहीं है | आज तक मै किसी के साथ नहीं सोई |
क्या मेरा मन नहीं करता कि मेरा बॉय फ्रेंड हो ..... क्या मेरा मन नहीं करता कि मै उस कोठरी से निकल कर कभी बहार नीले आसमान के नीचे अपने प्रेमी के साथ घूंमू | तुम मेरे को अच्छे लगे और तुम्हारे विचार भी शालीन थे | तुमने मेरे को एक लड़की की तरह देखा न कि नाचने वाली की तरह | तुम सच में देवता हो मेरे लिये |"
और फफक कर वरुण की छाती से चिपक कर रोने लगी | वरुण की आँखों में आंसू आ चुके थे |
वरुण बोला मै हूँ ना तुम्हारा दोस्त .... मत रो प्लीज़ |किसी तरह वरुण ने अक्षरा को चुप कराया और फिर उसको बाजार की ओर छोड कर घर चला गया |
मुलाकातों का दौर बढ़ता चला गया | अब इतनी मुलाकातों में वरुण भी अक्षरा को ठीक से समझ चुका था | एक दिन वरुण अक्षरा से बोला कि मेरे पास एक खबर है | अक्षर बोली वो क्या ??? वरुण कहता है कि मेरी शादी पक्की हो गयी है | लड़की का नाम रेशम है |
अक्षरा सन्न रह गयी | जैसे छाती में से किसी ने दिल को निकल लिया हो | आंसू पोंछते हुए बोली बधाई हो | साफ पता चल रहा था कि अक्षरा वरुण को चाहने लगी थी | वरुण भी रुआ सा हो उठा .. लग रहा था वो भी अक्षरा के चाहने लगा था | उसकी दोस्त से जाने रिश्ता रहता उसका शादी के बाद जाने ना | वरुण बताता है कि उसको शादी तथा व्यापार के सिलसिले से बहार भी जाना है करीब ४ महीनों में लोटेगा | अब तो अक्षरा उठी और बस चल दी वरुण आवाज देता रह गया |
कुछ दिन बाद वरुण की शादी थी | अक्षरा को फोन मिला मिला कर थक गया था फोन लग ही नहीं रहा था |उसने मनोज को इस मेसेज भेजा कि अक्षरा को मेरी शादी के बारे में बता देना | रिप्लाई आया कि मै तो जम्मू में हूँ बस तेरी शादी के दिन आऊंगा पर ये अक्षरा कौन है ? वरुण बोला वो रंगीली ..... मनोज को कुछ पता तो था नहीं ... उसको सवालों की झड़ी लगने से पहले उसने कहा अभी बाद में तेरे को सब बताता हूँ |
मनोज बोला तू चिन्ता ना कर तेरा काम करवा दूँगा | अहसानमंद रहूँगा , ऐसा कहकर वरुण ने फोन रख दिया | मनोज ने मौसी से कह कर रंगीली तक ये बात पहुंचा दी | रंगीली शादी में आई और शुभकामनायें दे कर चली गयी |
अब मनोज को शादी के कुछ समय बाद पता चालता है कि रेशम के गर्भ में जो बच्चा है वो उसका नहीं , ना वो उसको प्यार करती | वरुण पागल-सा हो गया | उसको कुछ समझ में नहीं आ रहा था ... कि करे क्या और क्या करे ???
उसको अपने मित्र मनोज की याद आई | उसने मनोज को कॉल कर सारी बातें बताई | मनोज ने कुछ कुछ सलाह दी कि रेशम से उसके बॉय फ्रेंड के बारे में पूंछे | रेशम से बहुत प्यार से विश्वास में ले कर रेशम से पूंछा और उसने अपने बॉय फ्रेंड का नाम अनूप बता दिया |
अब वो रेशम को लेकर अनूप से मिलने चल दिया | अनूप के पास पहुँच कर अनूप को सारी स्थिति बताई तथा अपने होने वाले बच्चे तथा रेशम को अपनाने के लिये कहा | लेकिन अनूप इस बात के लिये तैयार नहीं हुआ तथा बहाने बनाने लगा |तभी वरुण ने मनोज को फोन किया और मनोज इत्तेफाक से उसी शहर किसी कार्य से आया हुआ था | मनोज ने कहा कि १० मिनट इंतजार करो मै अभी तुम्हारे पास आ रहा हूँ |
१० मिनट बाद एक पुलिस की जीप अनूप के घर के आगे रुकी | और उसमे से एक इंस्पेक्टर मनोज ६ कांस्टेबल के साथ जीप से उतर कर घर की तरफ बढ़ने लगे | उनको देख कर अनूप की सासें उखाड़ने लगी | और फिर इंस्पेक्टर मनोज दनदनाते हुए बैठक में घुस गए | इंस्पेक्टर मनोज ने वरुण से गर्म जोशी से हाथ मिलाया और बोले बताओ क्या मामला है |
वरुण ने सारी बातें मनोज को कह सुनाई | मनोज ने अनूप को कानूनी और पुलिसिया भाषा दोनों में समझाया | थोड़े प्रयास के बाद अनूप ने वरुण से माफ़ी मांगी और रेशम को स्वीकार करने के लिये राजी हो गया | और मनोज के साथ वरुण अपने घर वापस आ गया |
मनोज ने वरुण से अक्षरा के विषय में पूँछा | वरुण ने बताया हम अंतिम समय शादी में मिले थे | मनोज उसको ले कर काला बाजार चल दिया और सीधा मौसी के पास पहुंचा | वरुण थोडा हिचकिचा रहा था परन्तु मनोज के साहस बंधाने पर वो चल दिया |
मौसी बैठी पान चबा रही थी | मनोज को देखते ही बोली , "क्या इंस्पेक्टर बाबू !!!!!!! तुम जम्मू क्या चले गए हमको तो भूल ही गए|"
मनोज मौके को सम्हालते हुए बोला ," ऐसी कोई बात नहीं है मौसी .. कैसे हो .... मिलता तो रहता था समय समय पर मेरा सन्देश | अब भी तो आया हूँ आपके पास और हँस पड़ा |"
मनोज ने मौसी से रंगीली के बारे में पूंछा | तो मौसी ने बताया कि जब से वरुण की शादी से आई है मेरा तो कोठा जैसे चलना ही बंद हो गया है | जाने कौन है ये वरुण | जब से आई है उसी रात से ना सोती है | ना कुछ खाती है , कभी खा लिया तो खा लिया ... उसकी एक थिरकन पर महफिल में सब वाह-वाह कर उठते थे अब वो ही रंगीली फीकी और सूख कर कांटा हो गयी है | जाने कितना समझाया उसको पर वो है कि समझने को तैयार ही नहीं | बस रोती रहती है |
इशारा कर के बोली "ये साथ में कौन है " ? कुछ खातिरदारी या व्यवस्था करवाऊ ??
"वरुण है"सुनते ही मौसी थोडा-कड़की थोडा-भडकी और बस मन मसोसकर रह गयी | और मनोज बोला इसको रंगीली से मिलना है | रूबी को बुला कर कमरे में भेज दिया | साथ ही पीछे मनोज और मौसी भी आ खड़े हुए |
रंगीली वरुण को देखा और अनदेखा सा कर के बैठ गयी |
वरुण ने बोला : "अक्षरा"| कोई जबाब नहीं आया | वरुण ने फिर से बोला : अक्षरा |
आवाज आई "यहाँ कोई अक्षरा नहीं है |" और रंगीली ......... "रंगीली वो नाचने वाली ............ वो तो आपसे मिलने के बाद ही खत्म हो गयी थी | तब से घुंघरुओं को हाथ तक नहीं लगाया है वरुण | "
अक्षरा क्यों नहीं है ? ??वरुण ने कहा |
"जब आप मेरे नहीं तो अक्षरा नहीं |अक्षरा को कोई नहीं जानता था .. सिवाय आपके ....रंगीली को अक्षरा बनाने का श्रेय जाता है तो सिर्फ आप को |"
वो बोली , "आपके साथ घूमना फिरना , मस्ती वो कुल्फी खाना और वो एक एक पल जो आपके साथ गुजर था .. उसकी को याद कर मै आज तक जी रही थी | इतना प्यार था और उसी प्यार पर विश्वास कि आप एक दिन जरूर आओगे | पर मेरे को ये भी पता था कि शादी होने के बाद आप किसी नाचने वाली के साथ क्यों घूमोगे " ....... और इतना कहते ही वो रो पड़ी |
"एक मुजरे में नाचने वाली लड़की की जिन्दगी को किस कदर आपने बदल दिया आपको इस बात का अंदाजा भी नहीं | अब मेरे को अकेला छोड दीजिए |"
"यहाँ इस तरह घुट-घुट कर जीने को ???" वरुण बोला |
अक्षरा ने कहा , "उस से आपको क्या वरुण मै कैसे भी रहूँ |"
"तुमने पहले क्यों नहीं बताया ये सब कुछ चल रहा था तुम्हारे जहन में ", वरुण ने कहा |
"कुछ भी बताने से पहले तुमने अपनी शादी की खबर जो दे दी थी | बता कर भी क्या होता ? तुम एक सफल बिजनिस-मेन हो | क्या किसी कोठे पर मुजरों में नाचने वाली लड़की से शादी करते ???" रूआंसी अक्षरा बोली |
अपने को सम्हाल कर बहुत हिममत कर के अक्षरा बोली भाभी कैसी है ? मनोज बोला , " हम उनको उनके घर हमेशा के लिये छोड आयें हैं | "
वरुण ने कहा , "क्या तुम मेरे साथ चलोगी ???" प्यारी-सी मुस्कान-स्वीकृति देख वरुण ने अक्षरा को ह्रदय से लगा लिया |
मौसी भी खड़े-खड़े देख रही थी | मनोज और मौसी के चेहरे पर भी सुकून के भाव थे |
| समाप्त |
Bahut badhiya.
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