आयी है याद एक बात ,आज उनकी गैर मोज़ूदगी में |
आई थी वो बुलाने चुपके से , बेमोसम-ऐ-बहार ज़िन्दगी में ||
चाहें छिपाले बदली मुझको अपनी चादर में |
मै हूँ वही जो नज़र आता है बरसात के बाद ||
वे बोले कि आज कल नज़र आते नहीं आप तो ,
बताया मै हूँ वही जो नज़र आता है मुद्दतो बाद ||
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