इश्क़ की फितरत जानता इश्क़ है |
इश्क़ में पिरोया वो मोती इश्क़ है ||
इश्क़ का दाग बेवफा रिश्ता इश्क़ है |
इश्क़ के मर्ज / दर्द की दवा ही इश्क है ||
चाही थी मैंने खिलखिलाती सी मुस्कान उसकी ,
याद है मैंने कभी तकलीफ तो नहीं मांगी थी ||
चाही थी मैंने सतरंगी-मोतियों सी जिन्दगी उसकी ,
याद है मैंने कभी ये जुदाई तो नहीं मांगी थी ||
No comments:
Post a Comment