दोस्ती के लिये

पौधा समय के साथ-साथ , 
            हरा-भरा पेड़ बन जाया करता है |
होती है एक मुलाकात जरूरी ,
              हर शुरुआती  दोस्ती के लिये ||

जब उनसे मिली थीं निगाहें हमारी ,
                   तब हुई थीं दो पल बातें थीं |
फिर बढ़ाया हाथ था मैंने अपना ,
          उस प्यरे रिश्ते : दोस्ती के लिये ||

उन्होंने हमसे पूंछा कि इस ,
 जिन्दगी  के मेले में क्यू आप अकेले हैं |
उस पल लगा ऐसा जैसे उतर आई है ,
   चान्दिनी चाँद से मेरी दोस्ती के लिये ||

आप तो करते हो विश्वास ,
              आँखें मूँद कर अपने दोस्त पर |
मै भी जानता हूँ जरूरी है ,
          विश्वास कितना  दोस्ती के लिये ||

पौधा समय के साथ-साथ ,
            हरा भरा पेड़ बन जाया करता है |
होती है जरूरी इज्जत सम्मान,
               और प्यार हर दोस्ती के लिये ||



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