तन्हाई

दिल में है वीराना ,
नज़रों से ये ज़ाहिर है |
देखेगी मुझे ऐसे तो ,
डर जाएगी तन्हाई ||

इस कदर आओ यहाँ कि ,
आवाज़ न हो पायल की |
अब हुआ शोर इस बार तो ,
बस मर जाएगी तन्हाई ||

झिझकते रहे बुलाया नहीं,
मुझको दिल-ऐ-आईने में |
लगता है अब हैं जहाँ में ,
मैं हूँ और मेरी तन्हाई ||

सोचता हूँ कभी - कभी ,
बैठा हुआ चुप - चुप मैं |
मेरे जहां से जाने पर ,
किधर जाएगी तन्हाई || 

-- © गोपाल कृष्णा "चौहान" |

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