करता हूँ मै तुम्हारा इन्तज़ार,
कसम है दिलोजान से |
बिना देखे कह सकता हूँ तुम ,
आयी हो परीस्तान से||1||
ये तुम जान चुकी हो हाँ ,
शायद नहीँ भी पर |
सच है बेइन्तहा प्यारी हो ,
तुम मुझे इस जहान से ||2||
किया ही जाये ,
हर-बात का इज़हार |
कहता नहीँ मै ,
पर जरूरी तो नहीँ||3||
पर हाँ !!!!!!!!!!!!!!!
कहने के लिये कुछ बातोँ को|
अल्फाज़ोँ की जरुरत ,
हुआ करती नहीँ ||4||
तुम हो पास तो ,
लगता है मुझे |
कुछ ऐसी ,
खिली-खिली सी ज़िन्दगी ||5||
तुम्हारे बिना ना-जाने क्योँ,
लगती है मुझे ये |
अधूरी-अधूरी सी ज़िन्दगी||6||
वो गुम-सुम सी परछाई मेँ ,
लिपटी हुई सी |
मै इस दुनिया की भीड़ मेँ ,
अकेला-अकेला सा||7||
वो हजारोँ तारोँ के बीच ,
अकेली टिम-टिमाती हुई सी |
कोई कम भी नहीँ ,
मेरे लिये चांद की चांदिनी से ||8||
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