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जीवन मन्त्र
ठरकी तो नहीं
देखते हैं जिसको पलके बिछाये ,
लगती है वो अपनी क्यों नहीं ....
और जो देखती है हमको तिरछी ,
निगाहों से वो ठरकी तो नहीं ||
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