शाम सुहानी

मै आजाद पंछी तुम्हारी उड़ने की चाहत क्यों नहीं ?
गुजर कर पास से फुलवारी को महकाती क्यों नहीं ?
मै साज संगीत पूर्ण तुम बिन रस ताल क्यों नहीं ?
मै रात तुम सुबह ये शाम सुहानी आती क्यों नहीं ?
ये शाम सुहानी आती क्यों नहीं ... ...... 


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