वो भी एक वक्त था यारों जब,
हम घोड़े बेच कर सोया करते थे |
हुई है मुलाकात जबसे उनसे ,
कमबख्त हमारे घोड़े बिकते ही नहीं ||
लगता है कर गयी जादूगरनी ,
पहली मुलाकात में कोई टोना |
नहीं दोस्त ये कोई खुशखबरी ,
भाई ये ही है सबसे बड़ा रोना ||
जैसे ही आते है पास तक ,
ग्राहक हमारे घोड़ो के |
आती है फोन पर आवाज ,
जानू आई लव यू कहो ना ||
मुझे व्यस्त देख इधर से
मेरे घोड़ों के ग्राहक जाते हैं ||
उधर से कुछ आवाज आती है ,
जानू कहीं दूर घूमने जाते हैं ||
सब को होती रैन पर ,
तब से हमारी रैन ही नहीं ||
पहले था सुख चैन पर ,
अब हमको सुख चैन नहीं||
वो भी एक वक्त था यारों जब,
हम घोड़े बेच कर सोया करते थे |
हुई है मुलाकात जबसे उनसे ,
कमबख्त हमारे घोड़े बिकते ही नहीं ||
No comments:
Post a Comment