तुम्हारे ही इंतजार में बैठा हूँ मै अब तक ,
याद है कहा था तुमने "मै इन्तजार करुँगी" ||
हम कर रहे थे इन्तजार ,
आपका उन गलियों में |
जहां पर प्यारी वो हमारी ,
वो ख़ास मुलाकात हुई थी ||
बदल लीं वे गलियां आपने ,
हमको साथ बुलाया तक नहीं |
शायद वो मुलाकात इत्तेफाक था ,
वो मिलन मुलाकात ऐ ख़ास नहीं ||
वो ख़त शायद उन तक न पहुँच सका ,
शायद पहुँचा भी पर नज़रअंदाज़ किया |
हमारे हालात जान चुकी थीं फिर भी वो ,
कहती रहीं "कृष्णा तुमको ये क्या हुआ" ??
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