वक्त -ऐ- कफ़न


कुछ दिन पहले मैंने कुछ पंक्तियाँ लिखीं थी और वक्त के न रहते पेश नहीं कर सका |
आज कुछ पलों का वक्त मिला है तो पंक्तियाँ कुछ इस तरह है ....

گزر گی امر میری
ہاں تامل مے تیری
گزر گی امر تیری
ہاں تول مے میری

تمام شکوے بھلا کر
مسکا دونگا می بھی |
گر کرے واڈا تو ملنے کا
وکٹ ا کفن پر

उर्दू से अनभिग्य मित्रों के लिए हिन्दी में  :

गुज़र गयी उम्र मेरी ,
हाँ तामील में तेरी |
गुज़र गयी उम्र तेरी,
हाँ तावील में मेरी||

तमाम शिकवे भुला कर ,
मुस्करा दूंगा मै भी |
गर करे वादा तू मिलने का  ,
वक्त -ऐ- कफ़न पर ||  


{उर्दू - हिन्दी शब्दार्थ :

तामील = बात को पूरा करने का प्रयास
तावील = बात को गोल गोल घुमाना | }

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