तब ही "मुहब्बत" ये नाम है

यारों मुझको देख वो ,
मंद-मंद जो हंसती है | 
लगता है समंदर में ,
तैर रही एक कश्ती हैं ||


दूर एक वीराने में ,
प्यार नाम की बस्ती है |
दूर रहूँ तुमसे तो ,
तन्हाई मुझको डसती है ||

जब से मिला हूँ मै तुमसे ,
तब से देखी है रैन नहीं | 
अब लगता है मुझको ऐसा ,
तुमको मुझ बिन चैन नहीं ||

लगता है कुछ ऐसा जैसे ,
ये प्यार कभी कम ना होगा |
अगर हो गया कुछ मुझको ,
तो मुझको कोई गम ना होगा ||

तुम कहती हो मुझको ,
तुमको क्या नहीं कोई काम है |
तुम हो ज़िन्दगी में ,
तब ही "मुहब्बत" ये नाम है ||



No comments:

Post a Comment