हम गुमसुम गुमसुम से ,
मिले अनजाने में तुमसे |
और बातों ही बातों में ,
यूं खो गये हम हमसे ||
इन्तजार कर रहा था सदियों से ,
इन प्यारी सी आँखों में वो नूर है |
बस एक ही शिकवा है मुझे रब से ,
पास आकर भी मुझसे इतनी दूर है ||
आपसे मिलकर हम को ,
सपने सच्चे लगने लगे |
और बस रफ़्ता रफ़्ता एसे
आप हमे अच्छे लगने लगे ||
हम करते हैं कभी-कभा ,
परेशान तुमको इस कदर |
ये है इश्क़ जुर्म या जुल्म ,
फैसला तुम्हारे हाथों में है ||
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