आप से हुई दो पलों की बातें
उन चान्दिनी रातों में |
बस गुजर जाय यूँ जिन्दगी
चंद प्यार की बातों में ||
छोटे-छोटे कागजो पर ,
मुहब्बतों के पैगाम लिखना |
और आपका चुप - चुप ,
इस कदर मुस्काते दिखना ||
आपकी जुल्फों की छाव में ,
वो उस खुशबू का सपना |
इस चान्दिनी रात में अब ,
वो सपना लगता है अपना ||
आपके चेहरे की मुस्कान ,
वो गुलाब-सी ताजगी |
जैसे बिखराती है पूरी ,
दुनिया में एक सादगी ||
इस कदर चुपके चुपके ,
उनका नजरों को मिलाना |
दीखता है अब हमारा ,
बस उन्ही में ठिकाना ||
मेरा कुछ कहना आपसे
या
मेरा कुछ भी न कहना आपसे |
और इस कदर उन बातों को
यूं आपका दिल से लगा लेना ||
वो झुकी झुकी सी पलकें उनकी
और लबों पर मुस्कान का खिल आना |
मेरे छूने भर से उनका ,
ख़ुद ही में सिमट जाना ||
फिर धीरे-से खोलना झील सी आँखें ,
और मेरा उनमें डूब जाना |
मेरे दिल में शरारत भरी ,
निगाहों से उनका उतर जाना ||
रखना फिर मेरे कांधे पर सर अपना ,
और धीरे से गुनगुनाना |
मुहब्बत है क्या बस ऐसे ही ,
एक पल में मैंने है जाना ||
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