अभी कुछ दिन पहले गोलू अपने घर के सामने पुराने कपड़ों के बदले बर्तन बेचने वाले से मोल भाव कर रहा था |
कपड़ों के 2 ढेर पड़े थे | कई कपड़े तो बिल्कुल नए जैसे ही थे पर बर्तन वाला स्टील का एक छोटा डिब्बा मात्र देने पर अड़ा हुआ था | गोलू चाहता था की उसको उन कपड़ों में एक कनस्तर मिले । आखिर उसने कुछ सोचा और उसे कपड़े देने से मना कर दिया।
कुछ देर बाद गोलू अनाथालय से बाहर आया तो उसके मन में शांति थी। उसने सोचा कि कपड़े नंग-धड़ंग बेसहारा बच्चों के तन ढ़कने के काम आएँगे।
शाम को गोलू अनाथालय के गेट के आगे से गुज़रा तो देखा कि वही बरतनों वाला उसके कपड़ो को एक मैली-सी चादर में बाँध रहा है । वह चेहरे पर खचरी-सी मुस्कान लिए उसकी ओर देख रहा था और स्टील का छोटा डिब्बा अनाथालय में मेन गेट के पास रखी हुई मेज पर पड़ा था।
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