हकीकत और तन्हाई

उन्होंने कहा सुनो कृष्णा तुम ,
चाहत है मेरी तुमसे ,
पर हाँ ये महज मजाक है |

हम न कह भी सके उनसे ,
कि ये कैसा मजाक है |

कल तक बरसा था सावन ,
इन आंखों मे .....
लगा आज सब सूख गया |

बस एक बात बता दो मुझको ,
वो सज़दा क्या इतेफाक था ||

नहीं लिखता कभी आंसूं को ,
कहीं .....
रो न पडे दिल से पढने वाला ||

हाँ पर जानता हूँ मै अच्छे से 
हकीकत और तन्हाई लिखना ||





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