ले कर आये गुलाब जब पास हम ,
सीखते देखा है गुलाब को महकना आपसे |
मुस्कान जब देखी हमने आपकी ,
लगता है रिश्तों ने मुस्काना सीखा है आपसे |
सभी को मिलता नहीं आसानी से ,
जितना इश्क़ यूं हमने किया है आपसे |
ये अहसास-ए-मुलाकात आपके लिए था ,
खामोशियों में साथ मुझको चाहिए आपसे ||
शायद आपको नहीं पता ,
सो कहते हैं हम आप से |
बेजान इन गुलशन में ,
फूल खिलते है आप से ||
ये मधु उपहार है ,
मिठास है इसकी आपसे |
इस रिश्ते को शुरूआती ,
मधुरता चाहिए आपसे ||
आँखे जो निहारती है आपको ,
उनका नूर है आपसे |
ज़िन्दगी भर का साथ रहेगा ,
ये वादा है आपसे ||
यही प्यार है या हमारी ,
दिल लगी है आपसे |
लगालो दिल से छोटी-सी ,
ये चाहत है आपसे ||
ये सूरज ने चमकना ,
क्या सीखा है आपसे |
बस यही छोटा-सा ,
एक सवाल है आपसे ||
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