गर हम होते

गर हम होते माली पेशे से तो ,
उनकी जुल्फों को कब-का सजा दिया होता |

गर हम होते मूर्तिकार पेशे से तो ,
उनकी जान को मुजस्समे में कब-का बसा दिया होता |

गर हम होते अध्यापक पेशे से तो ,
उनको ढाई अक्षर "प्रेम" का पाठ कब-का पढ़ा दिया होता |

गर हम होते शायर पेशे से तो ,
उनसे प्यार को कागज पर कब-का उतार दिया होता |

गर हम होते हकीम पेशे से तो ,
अपनी आशिकी का इलाज कब-का कर लिया होता |

गर हम होते वकील पेशे से तो ,
उनसे इश्क का मुकदमा कब-का जीत लिया होता |

गर हम होते चोर पेशे से तो ,
(कोई हो जाए ना मदहोश इन निगाहों को देख कर )

गर हम होते चोर पेशे से तो ,
उनकी नज़रों का नूर कब-का चुरा लिया होता |
........................ कब-का चुरा लिया होता |

No comments:

Post a Comment