चांदिनी बिखराती क्यों नहीं

अँधेरा कमरा हूँ मै ,
तू आकर दीया जलती क्यों नहीं ||

पानी का दरिया हूँ मै , 
तू आकर प्यास बुझती क्यों नही ||

सूरज सा जलता हूँ ,
मै सबको राह दिखाने को ||

अमावस की रात हूँ मै ,
तू आकार चांदनी बिखराती क्यों नहीं || 

और ...............

" निकलती है चाँद से किरणें ,सूरज की जिस तरह |
मिला है तेरा प्यार , मुझको कुछ इस तरह || "




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