मेरे एक पुराने चित्र को देख कर मेरे एक दोस्त बोला |
बोला कम उसने मेरे ऊपर एक प्रश्नों का पोटला खोला ||
वो बोला :
कमर फिर भी पलती है ऊपर से सीना चौड़ा हुए जा रहा है |
ये बात तो बता दे तू मेरे को आज कल तू क्या खा रहा है ||
मैंने कहा कि बेटा यही तो महंगाई की मार है |
मैं खा रहा हूँ रोटी और साथ में सूखा आचार है ||
प्यारे पहले मैं सच में मेरे मोटा तगड़ा हुआ करता था |
एक साथ ९० दंड बैठक और निरा दूध मारा करता था ||
हाल जो दिख रहा है इंजीनियरिंग कालेज का अत्याचार है |
और जो बचा हुआ सुखाया है मुझको उसका नाम प्यार है ||
No comments:
Post a Comment