कसम से बहुत ,
याद किया है हमने||
चाहत इतनी कि ,
मरने की नोबत आ गयी थी ||1||
एक अहसान है उसका ,
बचा लिया उसने हमको
वो क्या ? ??
आपकी याद जो आ गयी थी ||2||
जो है हकीकत ,
वो सुनने का दिल करता नहीँ ||
जो करता है दिल ,
वो हकीकत क्योँ नहीँ ??3??
हकीकत है वही ,
जो होना है ||
जो चाहता है दिल ,
वो होता क्योँ नहीँ ??4??
तब सोचा था क्या-क्या ??
क्या-क्या थे सपने ??
सोचा तो इतना भी कि
वो थे मेरे अपने ।|5||
पर हकीकत थी कुछ ,
और सच्चाई कुछ और ही थी ।|
हकीकत है हो चुके है वो पराये ,
और सच्चाई कि वो अभी तक है अपने ||6||
No comments:
Post a Comment