उस शाम हुई उस वर्षा ने ,
देनी चाही सब को खुशी |
कोई झूम उठा बारिश में पर,
मिली क्या सब को खुशी ??1??
हरियाली हो गई वहां ,
चहक उठे पंछी भी वन में |
पर उनका क्या छोटे-पेड़ ,
जो बहे जाते है पानी में ||2||
अमीर होजाते है अमीर ,
गरीब होजाते है गरीब |
कुछ उड जाते है आंधी में ,
कुछ बह जाते है पानी में ||3||
रह जाते है जमाते है जमीन पर ,
जमींदारों की तरह अपने हाथ |
जानते हुए भी काटना है ,
कटना है लकडहरों के हाथ ||4||
सही है हकीकत है ये ,
होती है रात के बाद सुबह |
पर होती है हर सुबह के बाद रात ,
ये भी कोई अफसाना तो नहीं ||5||
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