हे! दया निधि करुना की सागर ,
वीणा वादिनी को प्रणाम करता हूँ |
इस लेखनी से अर्चना पूजन वंदन ,
करने का एक प्रयास करता हूँ ||१||
हाथ में पुस्तक वीणा ,
स्फटिक माला अति प्यारी |
जन्में नई कोपलें अब तो ,
वसंत ऋतु भी हैं न्यारी ||२||
शिक्षा दीक्षा कला की देवी ,
नव दुर्गा में हो महा देवी |
हम करते हैं आपकी भाक्ति
करो प्रदान हमें स्मरण शक्ति ||३||
अंधकारमय है ये जीवन ,
माँ करो प्रदान नव जीवन |
कदम नहीं हैं सीधा पड़ता ,
दूर करो जीवन की जड़ता ||४||
कमल आपका प्रिय आसन ,
हंस आपकासेवक वाहन है |
मम भीतर सत्य क्षमा शीलता ,
अब करे वास सदैव निर्भीकता ||५||
देखो माँ एक बार तो देखो ,
यहाँ दिखेगी एक कतार |
अब नहीं शेष समय , कर दो
झंकृत मस्तक वीणा के तार ||६||
हे माता ज्ञान की देवी ,
सुन लो मेरी पुकार |
हाथ जोड़ विनती करता हैं
गोपाल कृष्णा बारंबार। ||७||
-- © गोपाल कृष्णा |
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