देखा मैंने उसको ..........
चलते रास्ते पर जाते हुए |
ले जा रहा था हाथ में पिन्नी ,
दो रोटी छिपाते हुए ||१||
कुछ उदास-सा कुछ परेशान-सा ,
कुछ बात जहन में छिपाते हुए |
चला जा रहा था वो अपने ,
कदम तेजी से बढ़ाते हुए ||२||
आखिर पहुँच गया वो वहाँ ,
जहां देखे थे ट्रक आते हुए |
लग गया काम पर मजदूर
अपनी कुदाल चलते हुए ||३||
जा रहा था कोने में एक ,
सोच रहा था कुछ जाते हुए |
शायद रो रहा था वो ,
उस पल रोटी खाते हुए ||४||
भ्रष्ट ठेकेदार का वर्णन करता हूँ :
तय हुई थी २५०० की बात ,
भगा रहा था १५०० पकडाते हुए |
नहीं आ रही थी शर्म उसको ,
एक गरीब को सताते हुए||५||
अगले दिन सुबह सवेरे ,
नहीं था अकेला वो जाते हुए |
चेहरे पर था एक सुकून ,
बेटी को स्कूल लेजाते हुए ||६||
देख मैंने उसको चलते ,
रास्ते पर जाते हुए .................................
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