आवश्यक सूचना : कहानी का उद्देश्य मनोरंजन मात्र है न कि अन्धविश्वास को बढ़ावा देना | इसको वास्तविक जीवन से जोड़ कर न देखें | धन्यवाद |
न्यूज वालो को कुछ नहीं मिलता यार देख ना ये ना जाने किसी गाँव के इस मंदिर को दिखा रहे हैं | और देख तो क्या ड्रामा है | एक है प्रसिद्द मंदिर मुरादो का और पास में हैं पानी वाली माता का मन्दिर | उन पर पानी चढाओ तो ये खुश हो जाती है | व्हाट अ रबिश यार .... और ऐसा कह राकेश हंसने लगा | मैंने कहा कि ये केस मीरपुर का है ना | उसने कहा तुझको कैसे पता तो मै भी हंसने लगा कि बेटा तू कुछ नहीं जानता | ये हमारा बनाया हुआ ही है | और ये सच्चाई है कोई मज़ाक नहीं है | तुझको नहीं पता कि कितनी मेहनत की थी इस काम के लिये | मेरे को सीरियस देख वो बोला कि कैसे किया था ये सब कुछ , तू कब से जानता है ये सब कुछ ? अधिक उत्सुकता आदमी को पागल बना देती है | वो भी पागल - सा हो गया और पीछे पड़ गया |तो मैंने उसको कहा कि वो किसी को नहीं बताएगा | वो मान गया तो मैंने उसको कहा कि ये बात ६ साल पुरानी है |
३ दिन बाद राहुल का बर्थ-डे था | गर्मी थी वो भी रिकोर्ड तोड़ | हम क्लास बंक कर सभी मित्र कालेज केन्टीन में बैठे थे और सोच रहे थे कि इस बार किया क्या जाय | बंक का तो प्रोग्राम तो बना ही चुका था | सुरेश ने कहा कि इतनी गर्मी है कुछ भी करने का दिल तो करता नहीं | गरिमा अलग ही परेशान हो रही थी और श्वेता से कह रही थी कि मेरा तो मन है नहीं कुछ करने का | किसी का भी कुछ भी खाने का मन नहीं था | अजय ने कोल्ड्रिंक्स ऑर्डर कर दी | दोस्त की बर्थ-डे और एन्जॉय कैसे करें | किसी का कोई मन न देख राहुल परेशान-सा हो गया | तब मैंने कहा कहीं घूमने चलते हैं | मस्ती करते हुए जाएँगे | इस को सुन अंकित ने कहा कि बात तो ठीक है पर जाएँगे कहाँ ? ?
एक और नया प्रश्न खड़ा हो गया | फिर तो बहस शुरू हो गयी कोई बोला आगरा चलते हैं | कोई बोला झुमारितलईया | समय को देखते हुए हम सभी ने डिसाइड किया कि दिल्ली ही चलते हैं सुबह मूवी देखेंगे फिर पूरा दिन घूमेंगे शाम को किसी रेस्तरां में पार्टी करेंगे | बोटिंग करें और सभी ने कुछ न कुछ सोच लिया |
दिन आ गया जिस दिन मजे ही मजे थे | हम सब सुबह निकल चले | रास्ते में फ्रेंड्स कार्नर आइसक्रीम पार्लर था | वहाँ पर हमने वहाँ से कुछ स्नेक्स और सोफ्ट ड्रिंक्स लेने के लिए गाड़ी रोकी | शायद शहर का सबसे अच्छा पोर्टल था जहां पर स्नेक्स आइसक्रीमस की वेराइटी मिलजाती है | अजय से गरिमा ने बोला कि चल जा कर लेआ | अजय बीच ने बैठा था | आखिर कर मै ड्राइवर की सीट के बराबर में जो बैठा था मेरे को उतर कर दूकान पर गया और वहाँ पर कुछ ऑर्डर किया | अब तक तो सभी उतर के आ चुके थे | और अपनी अपनी मांग करने लगे | वहाँ पर कार्य करते एक आदमी को मैंने बातें करते सुना की उसको केबिन में भेज देना | अगले पल ही वो हम सभी के पास कोल्ड्रिंक और सभी सामान ले कर खड़ा था | उसने कहा कि आप सभी कहीं जा रहे हैं क्या ?? मैंने कहा हाँ जी | अजय बोला हमारे दोस्त का जन्म दिवस है हम सभी दिल्ली जा रहे हैं | उसने कहा कि उसका गाँव मीरपुर रास्ते में है | क्या हम उसको ले जाएंगे ?? उस के गांव के मंदिर में एक बड़ी पूजा है | गाँव कोई ज्यादा दूर नहीं था | करीब ३५ मिनट का रास्ता | पर रिक्त स्थान न होने के कारण उसको मना कर दिया गया | हम सभी सामान ले कर जाने लगे | दिल्ली गए मूवी देखी मस्ती की और शाम केक और पार्टी के बाद सब काम हो गया |रात हो गयी और सब वहीं पर एक रूम किराये पर ले कर रुक गए | हम थक सो गए और सुबह होते ही वापस चलने का प्रोग्राम बनाने लगे |
श्वेता ने कहा कि क्यों ना मीरपुर चले | ग्रामीण शैली को देखेंगे और वहाँ पर पास में एक मंदिर भी है बहुत पुराना और प्रसिद्द मंदिर | वहाँ पर शाम से बड़ी पूजा है मैंने भी सुना है उस पूजा के बारे में | उस मंदिर में चलें | किसी को कोई आपत्ति नहीं थी सिवाय मेरे | मैंने कहा कि इसे रात को किसी भी अनजान मंदिर में जाना उचित नहीं | पर सभी मेरे पर हसने लगे | मै कुछ तो खुश था | मेरे को फोटोग्राफी करने के लिए बहुत कुछ मिलने वाला है परन्तु ना जाने क्यों एक खतरे का आभास-सा हो रहा था | कोई नहीं हो हल्ला करते हुए हम वापस आ रहे थे , रास्ते में मीरपुर की ओर गाड़ी मोड ली गयी | बहुत ही अच्छा गाँव था | मनमोहक दृश्यण से युक्त | लहलाते खेत बाग और पानी के बम्बे , नलकूप और आगे चलने पर बस्ती आई | गाड़ी हमने पीछे ही छोड दी थी | इस ज़माने में भी गोबर मिटटी से लिपे पुते कच्चे मकान और दही बिलोती महिलाएं और भी बहुत कुछ देखने को मिला | मैंने सब कुछ कैमरे में उतारने की शुरुआत भी कर दी थी | उधर अजय गाव वाली बालाओं से बात कर रहा था .. श्वेता भी किसी गांव वाली से बात कर रही थी | सब बहुत मस्ती कर रहे थे | बहुत ही अच्छा समय था कल से अभी तक तो | मैंने भी एक ठीक-ठाक से आदमी को पकड़ा और पूंछा कि आप क्या करते है और कुछ बातें भी की | वो एक किसान था | फिर मैंने उस से कहा कि यहाँ पर बड़े मंदिर में पूजा होती है | तो उसने कहा कि हांजी | और बहुत से लोग दूर दूर से आते हैं इस पूजा में | मैंने कहा कि ये तो ८ बजे होती है ना रात में तो वो थोडा सा सहम गया और कहा कि नहीं ये तो ५ बजे से ७ बजे तक होजाती है और रात को किसी का वहाँ जाना वर्जित है | मेरा दिमाग खराब - सा होने लगा और आदत जो थी ऐसा सभी कुछ जानने की तो कुछ जानने की |
कोशिश करने लगा | खैर बात मैंने किसी को नहीं बताई | शाम हो गयी | आना सार्थक-सा प्रतीत हो रहा था और एक मेले के जैसा दृश्यण देखने को मिल रहा था | गाँव वाले पूरी तरह घुल मिल गए थे | पर मेरी लाख कोशिश के बाद भी मेरे को कोई बात ठीक से नहीं बता रहा था | मैंने एक लड़के का फोन नंबर ले लिया था | वो शायद कुछ जनता था | हम सभी पूजा के बाद सभी से आज्ञा ले कर अपने शहर को निकल लिए | प्रधान जी ने कहा कि फिर से आना | सच में बहुत अच्छा लगा | मैंने कहा कि अब की बार समय मिला तो २ दिन और २ रातो के लिए आएंगे | इस पर प्रधान कुछ परेशान हो गए और बोले कि गाव में रात को गाँव से बहार का कोई नहीं रुक सकता ऐसी गाँव की प्रथा है | सभी ने बात को हंस कर टाल दिया | और हम सब चल दिए | बहुत मजा आया पर कुछ तो था जो मेरे मन को घुमाए हुआ था | आखिर क्या था राज ... क्या होता था आठ बजे के बाद क्यों प्रधान ने रात को रुकने के लिए मना किया | मीरपुर से लौटते -लौटते ८.३० बज गए | सभी को उन के घर छोड दिया और मै भी अपने घर पहुँच गया और इंटरनेट पर इस के बारे में खोजने लगा | फतेहबाद का एक गाँव है इस से अधिक कुछ भी न जान सका | फिर मेरे को याद आया कि मै आइसक्रीम पार्लर में जब अपने दोस्तों के साथ था तब एक आदमी उसी गाँव का था | मैंने उस गाँव वाले से फोन कर के पूंछा कि बात क्या है तो उसने कुछ भी कहने से मना कर दिया | अब मै और चिंतित होने लगा कि आखिर बात है तो है क्या ??
मैंने ये बात अपने एक मित्र को बताने का एक अहम फैसला लिया | उसको भी रहस्य में रूचि थी | मैंने कुंवर को पूरी बात कह सुनाई | उसने कहा कि हम मीरपुर चलते हैं फिर ही देखते हैं मामला क्या है ?
परीक्षा के बाद कुछ दिन फ्री थे | हम ने जाने का विचार किया | उस बंदे को फोन किया और बताया कि हम आ रहे हैं और पहुंच गए गाँव सुबह सुबह ना-जाने किसके ट्यूबबेल पर तो नहाये और फिर मंदिर गए | परिचित तो हो ही गए थे कुछ व्यक्ति उनमे से वो ढाबे वाला भी था | मेरे को लगा ये काम का आदमी है | उस से चर्चा प्रारंभ की पीपल के पेस शुरुआत की और भूत जिन्न तांत्रिकों के रास्ते पहुँच गयी मीर पुर | उसने तो बात का पत्ता ही काट दिया यार | और बोला ७० रुपये का बिल हुआ परन्तु आप ५० दे दो बस | यार भगाने पर तुला पड़ा था | मेरे को तो कुछ ऐसा ही लग रहा था पर बातों बातों में मेरे को बहुत कुछ पता चल चुका था | कोई नहीं , हम गाँव गए खूब मस्ती की और चालाकी से वहीँ ७.३० बजा लिये | फिर क्या था कोई जाने थोड़े देता और पर एक दिक्कत की बात हो गयी | कोई रुकने भी नहीं दे रहा था | प्रधान जी से बातें हुई तो उन्होंने कुछ तो डाट डपट लगाई फिर ना जाने किस की सिफारिश से सब सामान्य सा हो गया | मेरे को और अंकित को प्रधान जी के गेस्ट रूम में रात गुजरने को स्थान मिला | वो सड़क के पास था | पर क्या थी वो बात जिसके लिये यार ये रात को रुकना तो दूर गुजरने तक मना करते थे |
हम अभी उस कमरे को देख रहे थे | पास में ही मंदिर था | जा कर हाथ जोड़ आये | प्रधान की लड़की एक दम फ़िल्मी स्टाइल में आई तो थी |यार वो भी बहुत सुन्दर पिक्चर ज्यादा नहीं चल सकी | खाना और छाछ ले कर आई थी और पकड़ा कर चलती बनी पर चलते चलते बोली " बाबू रात को सोना कुछ और नहीं करना | " मै "डबल माइंडिड" हंस कर बात टाल दी | मै भी सोच रहा था कि प्रधान जी को हमारे यहा पर रुकने के लिये हो ना हो इसी का हाथ है | साथ में खुश हो रहा था | पहली बार ऐसे किसी ने रात को आ कर खाना दिया | कुछ मजे से आ रहे थे | उधर बैठा मेरा मित्र जा जाने कितना डर रहा था |
अब क्या था मजे से खाना खाया | मैंने रात के कारण छाछ नहीं पी पर मित्र ने पी और लेट गए हम फोल्डिग पर और कोशिश होने लगी सोने की पर हमारी आँखों में नींद कहाँ |
करीब ११.४७ थे | मेरा दोस्त तो मेसेज से बातें कर रहा था और मै फेसबुक पर लगा हुआ था | लेटे लेटे मेरे को तो १२.१५ हो गए | दोस्त सो चुका था | मैंने उस पर चादर डाल दी | ऐसा ही समय था रात में ठण्ड बढ़ जाती है |
मैंने उस गेस्ट रूम के नाम पर अधपक्के कमरे की खिडकी खोली | तो मेरे तो होश ही उड़ गए | धुंधला सा याद है | हमारी गाड़ी उस स्थान पर नहीं थी जहां पार्क की थी और वहाँ पर गाँव के हिसाब से एक थोडा ठीक सा घर था | यार घर गया भाड में मेरी गाड़ी मेरे को बहुत प्यारी है पर गयी कहाँ ??
मैंने मित्र को उठाने की कोशिश की पर कामियाब न हो सका | वो तो घोड़े बेच कर सो रहा था | तब ही मेरे को आवाजें सुनाई आने लगी | मेरा तो गला सूख गया | हालत पतली फिर भी साहस से काम ले कर मैं खिडकी की ओर गया देखा तो डर-सा ही हो गया था | घर में आग लगी हुई थी |
एक औरत सभी के घरों पर भाग कर किवाड़ बजाती और कभी सड़क पर जा कर इधर उधर देखती | अजीब सा दृश्य था सोच कर भी रूह काँप जाती हैं | नंबर मेरा भी आया | हमारे रूम की किवाड़ भी बजी | पर तब ही प्रधान की लड़की की बात याद आई , रात को सोना कुछ और नहीं करना | मैंने किवाड़ नहीं खोली और सोने की कोशिश करने लगा |
सुबह हडबडा कर मेरी आँख खुली | दोस्त परेशान बैठा था | मैंने घबराया हुआ था | और वो परेशान | मैंने कहा तुझको क्या हुआ ... मेरे को लगा कि इसने देख लिया मेरी गाड़ी बहार से गायब है | मैंने पूंछा कि क्या हुआ तो बोला कि रात खाना अधिक हो गया मेरे को जाना है और यहाँ पर तो कोई जुगाड नहीं है | खेत में मेरे को जाना नहीं | प्रधान जी के घर चलते हैं मेरे को ड्राइविंग आती नहीं | अब मै परेशान उसको क्या बताऊ | फिर भी अंगडाई सी लेते हुए उठा और किवाड़ खोली | अब फिर होश उड़ गए | ना कोई घर जलने की राख ना कुछ सब कुछ सामान्य | गाड़ी भी वहीँ खड़ी थी आखिर ये हो क्या रहा है | भाग कर गाड़ी के पास पहुंचा और छू कर देखी हाँ ये मेरी ही गाड़ी थी और बिलकुल सही हालत में मेरी हालत कुछ सुधरी पर दोस्त की बिगड़ती जा रही थी | उसको प्रधान जी के ले गए और वहाँ पर जा कर वो फ्रेश हुआ | मै भी वहीँ पर नहाया | आज ट्यूबबेल वाला दौर ना चल सका | प्रधान की लड़की फिर चाय ले कर आई और प्रधान को पास ना देख साथ ही बैठ गयी | वो बोली
"बाबू रात को नींद तो ठीक से आई ना | छाछ कैसा था सुबह का था खट्टा तो नहीं हुआ था ना "
मैंने कहा ,"इस से पूंछो मैंने तो पिया ही नहीं |"
अब उसके चेहरे पर भी पसीने और मेरे तो होश ही फकता थे सुबह से | मैंने कहाँ क्या हुआ तो बोली कुछ नहीं | आप कितने बजे सो जाते हो ? मैंने कहा कि मैं तो रोज ही १ बजे सोता हूँ |
प्रधाननी आ चुकी थी | हम दोनो ने चरण स्पर्श किये और उसी के घर में बोले बोले आइये माँजी कैसे हैं आप ? फिर इधर उधर की बातें हुई और वो बोली की यहाँ पर रात को कभी ना आना | दिन में तो तुम्हारा ही घर है जब चाहो आजाना | उसकी लड़की मुस्करा रही थी | मेरे को तो कुछ समझ आ नहीं रहा था ये मेरे को सेट करने की कोशिश कर रहे हैं क्या ..
मैंने पूंछने को ही था की आखिर बात क्या है रात को ये ड्रामा क्या है घर का अपने आप आ जाना , जल जाना खुद कानो से सुनी थी चीख पुकार और आँखों से देखी घटना थी | सब कुछ ऐसे गायब हो जाना जैसे गधे के सर से सींग | इतने में ही प्रधान जी सेवक के साथ आ गए और बोले कि इनको हमारे बाग में घुमा लाओ | मेरा ध्यान तो प्रधान की लड़की पर था , जाते जाते मैं बस इतना ही सुन पाया , माँजी कह रहीं थी कि तूने छाछ में नींद की दवा मिलाई तो थी पर एक ने पी एक ने नहीं | हम निकल चुके थे | हम अपनी गाड़ी ले कर चल दिए धूप भी ठीक से निकल आई थी | हमने बागों को देखने का विचार टाल दिया | और वापस आने लगे रास्ते में वो स्थान भी पड़ा जहां पर रात गुजारी थी | मै देख रहा था कि शीशे में मेरे को वो चेहरा दिखाई दिया | बहुत तेजी के साथ मै चला गया | और रास्ते में दोस्त को रात की बात बताई | उसने कहा कि मै उठा क्यों नहीं ?? तब मेरे को छाछ में नींद की दवा का राज खुलता-सा नज़र आया | हम सोते रहें रात भर और कोई दुखिया चिल्लाती रहे रात भर | पर वो थी कौन और ये ड्रामा था क्या ?
बहुत दिमाग मार लिया पर कुछ ना सूचा | एक और भाई नीरज वैसे तो साथ का ही था पर मेरे से अधिक जानता था | इस विषय में तो उस से पूंछा तो वो बोला या तो ये सपना है और अगर वही तुमने फिर से सुबह देखी है थी तो ये बहुत अधिक अशुभ स्थान है | मेरे को वो घटना देखनी है | मैंने मजाक में कहा कि पागल है अब तेरे लिये फिर उस घर को जलवायें जो कहीं है ही नहीं | वो बोला तू चुप कर तेरे को कुछ नहीं पता | मैंने कहाँ हाँ तांत्रिक बाबा तुमको ही सब कुछ पता है | और हम सब हंस दिये | पर ये भी सच था कि मीर पुर नाम से भी दहशत सी लगने लगी अब तो हम को |
पर क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय ..........
मै , नीरज और अंकित चल दिए एक बार फिर मीर पुर गुप चुप तरीके से |
पर इस बार नीरज के आदेशानुसार ही सब होना था | सब से पहले पहुंचे पुलिस स्टेशन | और वहाँ पर जा कर जानकारी लेनी चाही कि आखिर माजरा क्या है तो फिर वही राग कि हमने नहीं बताना कुछ | मैंने कहा कि हम खुद से देख लें फाइल |तो ना जाने क्यों वो मान गया | और नीरज ने कहा की जिस में जलने का केस हो वो सारी फाइल उठालो | फाइल उठा ली और कुछ देर पढ़ने के बाद वो फ़ाइल मिल ही गयी जो थी उस केस से मिलती हुई | इस के बारे में जानना चाह तो वो बोला कि खुद ही देखो शहरी बाबू हम कुछ नहीं बताएँगे | हमारी जान हमको प्यारी है |
फ़ाइल में कुछ ऐसा था :
राग कुमार और पुत्र राज कुमार पत्नि प्रभा देवी नाम है | आग लगने से घर में आदमी और बच्चे की मौत उसकी पत्नी की भी जल कर मौत | पोस्टमार्टम के बाद फाइल बंद |
हम सब लौट चले | अब लगभग सब कुछ साफ़ हो चुका था |
ये ही सब कुछ सारी रातों को चलता होगा | और यही कारण था कि वहाँ पर रात को रुकने को मना किया जाता था | मै रुका और मैंने देखा कि ड्रामा क्या है |
ठीक है हम रात में आयेंगे ऐसा नीरज बोला | मैंने कहा पागल है तू | तेरे को तो कुछ बताना ही पागलपन है | साला प्रेत-साइको | हंस रहे थे हम और साथ में डर भी था जहन में | जो होगा देखा जायगा | पूरी पूजा पाठ और जो जो मन्त्र सिद्ध किये हुए थे ९ बजे के बाद एक एक माला फेर कर | अपने ताबीज पहन कर पूरी सात्विक तयारी से रात को १०.३० पर हम निकले और ११ बजे के आस पास पहुँच गए मीर पुर सीमा में | जहां पर रात को जाना था निषेध | और अंदर घुसे तो वही नजारा | घर जल रहा है औरत बिलख रही है | चिल्ला रही है बचाओ बचाओ | मेरे पति और बच्चा अंदर है बचाओ | कभी पानी डालती है तो कभी दूसरों के घरों को पीटती है |
और कुछ देर बाद चिल्लाते चिल्लाते गाड़ी के पास आई और बोली बाउजी मेरे बच्चे पति और मेरे को बचा लो | और भागती हुई उसी घर में चली गयी जल कर राख हो गयी | हमारे होश फकता हो गए | मैंने तो फिर से पिक्चर देख ली इस बार पूरी देखी थी | गाड़ी मोड ली और नीरज के घर ही रात गुजारने का फैसला किया | और पूरी रात बातें की कि है क्या और हम कर क्या सकते हैं |
इतना तो पता चल ही गया था कि ये वियोग में है | और बाकी सारा फाइल और जिवंत दृश्याण सब कुछ साफ़ कर चुकी थी | एक बार फिर से हम प्रधान के पास गए इसी बात को ले कर और हमारे साथ नीरज भी था | उस से बातें शुरू की ही थी की उसने हमको डाट दिया | तुम लड़को को और कुछ काम नहीं | फिर नीरज बोला हम को सब पता है वो आग वो घर प्रभा देवी राज राग सब कुछ | अब तो प्रधान शांत हो गए और डरे सहमे से बोले चाहते क्या हो कितना चाहते हो ? मेरे को कुछ गडबड लगी जैसे इसी की कुछ गलती हो और रिश्वत दे कर बचना चाहता है पर नीरज बोला की हम पूजा करेंगे | जिस से ये समस्या सदैव के लिये समाप्त हो जाएगी | मेरे को बाहर प्रधान की लड़की दिखी मै बाहर मिलने चला गया |
कुछ देर बाद हम तीनों गाड़ी में थे | मैंने कहा की क्या हुआ ? तो नीरज बोला कि हो गया जो होना था | पूजन होगा और सब कुछ अच्छा होजाएगा और तू कैसे प्रधान की लड़की के साथ लगा हुआ है तो मैंने कहा बेटा इस बार तो मै नंबर भी ले आया मेरी जान |
दशहरा पास था | सोचा यही दिन बहुत अच्छा है पूजा के लिये | वहाँ गए और विधि विधान से पूजा अर्चना के लिये स्थान को शुद्ध करने लगे पर ये क्या .. सारा कुछ उल्टा हो रहा था | कुछ भी ठीक नहीं | हमको वापस आना पड़ा | एक दिन मै प्रधान की लड़की से बातें कर रहा था | वो कह रही थी कि माँ को पता है हम बातें करते हैं | बातों-बातों में उसने कहा कि क्या तुमने सच में उस रात छाछ नहीं पी थी | मैंने कहा कि नहीं और एक भयानक किस्सा है उस रात का | वो बोली कि मेरे को तुम से मिलना है | मै शहर आउंगी अपनी फीस जमा करवाने तुम करवा देना और हम इतने समय बातें कर लेंगे | मेरे को क्या परेशानी हो सकती थी | अगले दिन ही वो आ गयी |काम होने पर वो बोली तुमसे कुछ बातें बतानी है |
मैंने कहा बोलो यार तो वो बोली कि यार हमारा गाँव शापित है और वही कहानी बताने लगी जो मै दो बार देख चुका था | उसने बताया कि रात में होता है ये सब सबको दिखता है मैंने तुम्हारी खाने के साथ छाछ में नींद की दवा मिलाई थी जिस से तुम सो जाओ और तुम को कुछ पता ना चले | मै मन ही मन सोच रहा था कि इस बात को ले कर इस के बाप से भी मिल आये इसको कुछ पता ही नहीं | उसने आगे कहा कि इस में कुसूर मेरे बाप का है | उसने ही घर में आग लगाई थी | नकली कागज बना वो करोडो का मालिक हो गया है | हाई वे पर जमीन आ गयी है तो वो अरबों में पहुंचेगी | वो आदमी मेरा चाचा है | और वो औरत मेरी चाची |वो बच्चा मेरा चचेरा भाई है और कहते कहते सीने से चिपक कर रो पड़ी | मैंने उसको सांत्वना दी | और कहा सब कुछ ठीक हो जाएगा |
नीरज अंकित को सारी बातें बताई | नीरज ने कहा अब तो काम हो जाएगा | उसने कहा कि हम उसको बुलाएँगे और उस से कहेंगे कि वो चली जाय | अंकित बोला हाँ तेरी दासी है वो कहा तो चली जाएगी | हा हा हा .. हम सब हंस दिए क्योंकि हमको पता था करना क्या है |
दीपावली की रात को हमने पूजा करने का निश्चय किया | और रात ९ बजे तक सब कुछ तैयारी हो चुकी थी | वहाँ पर उस स्थान और उस मंदिर के पास में प्रधान के गेस्ट रूम के बहार चबूतरे पर हमने सारा कुछ प्रबंध किया था | शुद्ध किया , मन्त्र यंत्र साधना शक्ति पुंज आदि | प्रधान जी भी बैठे थे | प्रसिद्द मंदिर से ज्योत ले कर आये तथा आशीर्वाद लाए जिस से कि कार्य में सफलता मिले | फिर वही किस्सा शुरू हुआ और वो दरवाजे पीटते सीधे प्रधान के पास आई कि भाई साहब बचा लो मेरे इन को | ये आग आपने ही लगाई थी एक बार यूँ ही कहा होता आपको भला हम अपना सब कुछ क्यों ना देते | आखिर आप अपने हो | मैंने आज तक किसी का बुरा नहीं किया है मेरे साथ इतना बुरा क्यों ? वो बस माफ़ी ही मांग रहे थे | नीरज बोला तू मेरे से बातें कर | इससे क्या बात कर रही है | तो वो बोली मेरे पति घर में हैं और बच्चा भी घर में हैं इन को बचा लो | तो अंकित बोला एक शर्त है अगर तू मानती है तो हम तुझको राज और राग दोनों को स्थान देंगे | वो बोली कि मै कैसे मान लूं | जब अपने भी धोका देते हैं |
गुस्से की आग भड़क चुकी थी | उस दिन प्रधान मरता | प्रधान की सजा को क्यों दे रही है ? उस से कहा कि इसकी सजा ऊपर वाले ने लिख रखी है पुलिस को सारा केस पता है कार्यवाही होगी इसको इसके कर्मो की सजा होगी | वो गलती से कीले हुए इलाके में आ गयी थी जो प्रभावी कर दिया था | वो चाह कर भी कुछ भी नहीं कर पा रही थी | नहीं मानती तो वहीँ बंध कर रह जाती | प्रधान ने बहुत क्षमा याचना की विवश हो बोली मै तैयार हूँ पर शर्त बताओ | शर्त बताई गयी कि तू किसी को परेशान नहीं करेगी | तेरे को पूरे गाँव की रक्षा करनी होगी | तो वो मान गयी | वहीँ पर सड़क के किनारे ईंटो का एक छोटा-सा इंटो से एक घर बनाया और कहा कि राग , राज और तू अपना समय यहाँ पर व्यतीत करोगे | समय पूरा होने पर इस मृत्यु लोक से चले जाओगे | वो मान गयी | उसने कहा कि मेरा घर जलाया गया था | जो मेरे इस घर पर पानी अर्पण करेगा मै उसकी सहायता अवश्य करूंगी |
और इस तरह फाइलें फिर खुलवाई | प्रधान जी के कारण सारा गाँव दहशत में था | रुतबे के कारण कोई कुछ नहीं कहता | सभी का कष्ट समाप्त हुआ | सारे गाँव में खुश हाली आ गयी | प्रधान जी अभी अंदर है और वो पानी वाली माता नाम से प्रसिद्द हो गयी | दूर दूर से लोग आते थे | पर एक बात मेरे समझ में आज तक भी नहीं आई | वो आइसक्रीम पार्लर वाला कौन था जो उस गाँव का था पर गाँव तो हम भी गए थे वहाँ पर भी कोई भी उसको नहीं जानता था | सारा किस्सा ही उसकी वजह से शुरू हुआ | ना वो कुछ कहता ना हम जाते |
न्यूज वालो को कुछ नहीं मिलता यार देख ना ये ना जाने किसी गाँव के इस मंदिर को दिखा रहे हैं | और देख तो क्या ड्रामा है | एक है प्रसिद्द मंदिर मुरादो का और पास में हैं पानी वाली माता का मन्दिर | उन पर पानी चढाओ तो ये खुश हो जाती है | व्हाट अ रबिश यार .... और ऐसा कह राकेश हंसने लगा | मैंने कहा कि ये केस मीरपुर का है ना | उसने कहा तुझको कैसे पता तो मै भी हंसने लगा कि बेटा तू कुछ नहीं जानता | ये हमारा बनाया हुआ ही है | और ये सच्चाई है कोई मज़ाक नहीं है | तुझको नहीं पता कि कितनी मेहनत की थी इस काम के लिये | मेरे को सीरियस देख वो बोला कि कैसे किया था ये सब कुछ , तू कब से जानता है ये सब कुछ ? अधिक उत्सुकता आदमी को पागल बना देती है | वो भी पागल - सा हो गया और पीछे पड़ गया |तो मैंने उसको कहा कि वो किसी को नहीं बताएगा | वो मान गया तो मैंने उसको कहा कि ये बात ६ साल पुरानी है |
३ दिन बाद राहुल का बर्थ-डे था | गर्मी थी वो भी रिकोर्ड तोड़ | हम क्लास बंक कर सभी मित्र कालेज केन्टीन में बैठे थे और सोच रहे थे कि इस बार किया क्या जाय | बंक का तो प्रोग्राम तो बना ही चुका था | सुरेश ने कहा कि इतनी गर्मी है कुछ भी करने का दिल तो करता नहीं | गरिमा अलग ही परेशान हो रही थी और श्वेता से कह रही थी कि मेरा तो मन है नहीं कुछ करने का | किसी का भी कुछ भी खाने का मन नहीं था | अजय ने कोल्ड्रिंक्स ऑर्डर कर दी | दोस्त की बर्थ-डे और एन्जॉय कैसे करें | किसी का कोई मन न देख राहुल परेशान-सा हो गया | तब मैंने कहा कहीं घूमने चलते हैं | मस्ती करते हुए जाएँगे | इस को सुन अंकित ने कहा कि बात तो ठीक है पर जाएँगे कहाँ ? ?
एक और नया प्रश्न खड़ा हो गया | फिर तो बहस शुरू हो गयी कोई बोला आगरा चलते हैं | कोई बोला झुमारितलईया | समय को देखते हुए हम सभी ने डिसाइड किया कि दिल्ली ही चलते हैं सुबह मूवी देखेंगे फिर पूरा दिन घूमेंगे शाम को किसी रेस्तरां में पार्टी करेंगे | बोटिंग करें और सभी ने कुछ न कुछ सोच लिया |
दिन आ गया जिस दिन मजे ही मजे थे | हम सब सुबह निकल चले | रास्ते में फ्रेंड्स कार्नर आइसक्रीम पार्लर था | वहाँ पर हमने वहाँ से कुछ स्नेक्स और सोफ्ट ड्रिंक्स लेने के लिए गाड़ी रोकी | शायद शहर का सबसे अच्छा पोर्टल था जहां पर स्नेक्स आइसक्रीमस की वेराइटी मिलजाती है | अजय से गरिमा ने बोला कि चल जा कर लेआ | अजय बीच ने बैठा था | आखिर कर मै ड्राइवर की सीट के बराबर में जो बैठा था मेरे को उतर कर दूकान पर गया और वहाँ पर कुछ ऑर्डर किया | अब तक तो सभी उतर के आ चुके थे | और अपनी अपनी मांग करने लगे | वहाँ पर कार्य करते एक आदमी को मैंने बातें करते सुना की उसको केबिन में भेज देना | अगले पल ही वो हम सभी के पास कोल्ड्रिंक और सभी सामान ले कर खड़ा था | उसने कहा कि आप सभी कहीं जा रहे हैं क्या ?? मैंने कहा हाँ जी | अजय बोला हमारे दोस्त का जन्म दिवस है हम सभी दिल्ली जा रहे हैं | उसने कहा कि उसका गाँव मीरपुर रास्ते में है | क्या हम उसको ले जाएंगे ?? उस के गांव के मंदिर में एक बड़ी पूजा है | गाँव कोई ज्यादा दूर नहीं था | करीब ३५ मिनट का रास्ता | पर रिक्त स्थान न होने के कारण उसको मना कर दिया गया | हम सभी सामान ले कर जाने लगे | दिल्ली गए मूवी देखी मस्ती की और शाम केक और पार्टी के बाद सब काम हो गया |रात हो गयी और सब वहीं पर एक रूम किराये पर ले कर रुक गए | हम थक सो गए और सुबह होते ही वापस चलने का प्रोग्राम बनाने लगे |
श्वेता ने कहा कि क्यों ना मीरपुर चले | ग्रामीण शैली को देखेंगे और वहाँ पर पास में एक मंदिर भी है बहुत पुराना और प्रसिद्द मंदिर | वहाँ पर शाम से बड़ी पूजा है मैंने भी सुना है उस पूजा के बारे में | उस मंदिर में चलें | किसी को कोई आपत्ति नहीं थी सिवाय मेरे | मैंने कहा कि इसे रात को किसी भी अनजान मंदिर में जाना उचित नहीं | पर सभी मेरे पर हसने लगे | मै कुछ तो खुश था | मेरे को फोटोग्राफी करने के लिए बहुत कुछ मिलने वाला है परन्तु ना जाने क्यों एक खतरे का आभास-सा हो रहा था | कोई नहीं हो हल्ला करते हुए हम वापस आ रहे थे , रास्ते में मीरपुर की ओर गाड़ी मोड ली गयी | बहुत ही अच्छा गाँव था | मनमोहक दृश्यण से युक्त | लहलाते खेत बाग और पानी के बम्बे , नलकूप और आगे चलने पर बस्ती आई | गाड़ी हमने पीछे ही छोड दी थी | इस ज़माने में भी गोबर मिटटी से लिपे पुते कच्चे मकान और दही बिलोती महिलाएं और भी बहुत कुछ देखने को मिला | मैंने सब कुछ कैमरे में उतारने की शुरुआत भी कर दी थी | उधर अजय गाव वाली बालाओं से बात कर रहा था .. श्वेता भी किसी गांव वाली से बात कर रही थी | सब बहुत मस्ती कर रहे थे | बहुत ही अच्छा समय था कल से अभी तक तो | मैंने भी एक ठीक-ठाक से आदमी को पकड़ा और पूंछा कि आप क्या करते है और कुछ बातें भी की | वो एक किसान था | फिर मैंने उस से कहा कि यहाँ पर बड़े मंदिर में पूजा होती है | तो उसने कहा कि हांजी | और बहुत से लोग दूर दूर से आते हैं इस पूजा में | मैंने कहा कि ये तो ८ बजे होती है ना रात में तो वो थोडा सा सहम गया और कहा कि नहीं ये तो ५ बजे से ७ बजे तक होजाती है और रात को किसी का वहाँ जाना वर्जित है | मेरा दिमाग खराब - सा होने लगा और आदत जो थी ऐसा सभी कुछ जानने की तो कुछ जानने की |
कोशिश करने लगा | खैर बात मैंने किसी को नहीं बताई | शाम हो गयी | आना सार्थक-सा प्रतीत हो रहा था और एक मेले के जैसा दृश्यण देखने को मिल रहा था | गाँव वाले पूरी तरह घुल मिल गए थे | पर मेरी लाख कोशिश के बाद भी मेरे को कोई बात ठीक से नहीं बता रहा था | मैंने एक लड़के का फोन नंबर ले लिया था | वो शायद कुछ जनता था | हम सभी पूजा के बाद सभी से आज्ञा ले कर अपने शहर को निकल लिए | प्रधान जी ने कहा कि फिर से आना | सच में बहुत अच्छा लगा | मैंने कहा कि अब की बार समय मिला तो २ दिन और २ रातो के लिए आएंगे | इस पर प्रधान कुछ परेशान हो गए और बोले कि गाव में रात को गाँव से बहार का कोई नहीं रुक सकता ऐसी गाँव की प्रथा है | सभी ने बात को हंस कर टाल दिया | और हम सब चल दिए | बहुत मजा आया पर कुछ तो था जो मेरे मन को घुमाए हुआ था | आखिर क्या था राज ... क्या होता था आठ बजे के बाद क्यों प्रधान ने रात को रुकने के लिए मना किया | मीरपुर से लौटते -लौटते ८.३० बज गए | सभी को उन के घर छोड दिया और मै भी अपने घर पहुँच गया और इंटरनेट पर इस के बारे में खोजने लगा | फतेहबाद का एक गाँव है इस से अधिक कुछ भी न जान सका | फिर मेरे को याद आया कि मै आइसक्रीम पार्लर में जब अपने दोस्तों के साथ था तब एक आदमी उसी गाँव का था | मैंने उस गाँव वाले से फोन कर के पूंछा कि बात क्या है तो उसने कुछ भी कहने से मना कर दिया | अब मै और चिंतित होने लगा कि आखिर बात है तो है क्या ??
मैंने ये बात अपने एक मित्र को बताने का एक अहम फैसला लिया | उसको भी रहस्य में रूचि थी | मैंने कुंवर को पूरी बात कह सुनाई | उसने कहा कि हम मीरपुर चलते हैं फिर ही देखते हैं मामला क्या है ?
परीक्षा के बाद कुछ दिन फ्री थे | हम ने जाने का विचार किया | उस बंदे को फोन किया और बताया कि हम आ रहे हैं और पहुंच गए गाँव सुबह सुबह ना-जाने किसके ट्यूबबेल पर तो नहाये और फिर मंदिर गए | परिचित तो हो ही गए थे कुछ व्यक्ति उनमे से वो ढाबे वाला भी था | मेरे को लगा ये काम का आदमी है | उस से चर्चा प्रारंभ की पीपल के पेस शुरुआत की और भूत जिन्न तांत्रिकों के रास्ते पहुँच गयी मीर पुर | उसने तो बात का पत्ता ही काट दिया यार | और बोला ७० रुपये का बिल हुआ परन्तु आप ५० दे दो बस | यार भगाने पर तुला पड़ा था | मेरे को तो कुछ ऐसा ही लग रहा था पर बातों बातों में मेरे को बहुत कुछ पता चल चुका था | कोई नहीं , हम गाँव गए खूब मस्ती की और चालाकी से वहीँ ७.३० बजा लिये | फिर क्या था कोई जाने थोड़े देता और पर एक दिक्कत की बात हो गयी | कोई रुकने भी नहीं दे रहा था | प्रधान जी से बातें हुई तो उन्होंने कुछ तो डाट डपट लगाई फिर ना जाने किस की सिफारिश से सब सामान्य सा हो गया | मेरे को और अंकित को प्रधान जी के गेस्ट रूम में रात गुजरने को स्थान मिला | वो सड़क के पास था | पर क्या थी वो बात जिसके लिये यार ये रात को रुकना तो दूर गुजरने तक मना करते थे |
हम अभी उस कमरे को देख रहे थे | पास में ही मंदिर था | जा कर हाथ जोड़ आये | प्रधान की लड़की एक दम फ़िल्मी स्टाइल में आई तो थी |यार वो भी बहुत सुन्दर पिक्चर ज्यादा नहीं चल सकी | खाना और छाछ ले कर आई थी और पकड़ा कर चलती बनी पर चलते चलते बोली " बाबू रात को सोना कुछ और नहीं करना | " मै "डबल माइंडिड" हंस कर बात टाल दी | मै भी सोच रहा था कि प्रधान जी को हमारे यहा पर रुकने के लिये हो ना हो इसी का हाथ है | साथ में खुश हो रहा था | पहली बार ऐसे किसी ने रात को आ कर खाना दिया | कुछ मजे से आ रहे थे | उधर बैठा मेरा मित्र जा जाने कितना डर रहा था |
अब क्या था मजे से खाना खाया | मैंने रात के कारण छाछ नहीं पी पर मित्र ने पी और लेट गए हम फोल्डिग पर और कोशिश होने लगी सोने की पर हमारी आँखों में नींद कहाँ |
करीब ११.४७ थे | मेरा दोस्त तो मेसेज से बातें कर रहा था और मै फेसबुक पर लगा हुआ था | लेटे लेटे मेरे को तो १२.१५ हो गए | दोस्त सो चुका था | मैंने उस पर चादर डाल दी | ऐसा ही समय था रात में ठण्ड बढ़ जाती है |
मैंने उस गेस्ट रूम के नाम पर अधपक्के कमरे की खिडकी खोली | तो मेरे तो होश ही उड़ गए | धुंधला सा याद है | हमारी गाड़ी उस स्थान पर नहीं थी जहां पार्क की थी और वहाँ पर गाँव के हिसाब से एक थोडा ठीक सा घर था | यार घर गया भाड में मेरी गाड़ी मेरे को बहुत प्यारी है पर गयी कहाँ ??
मैंने मित्र को उठाने की कोशिश की पर कामियाब न हो सका | वो तो घोड़े बेच कर सो रहा था | तब ही मेरे को आवाजें सुनाई आने लगी | मेरा तो गला सूख गया | हालत पतली फिर भी साहस से काम ले कर मैं खिडकी की ओर गया देखा तो डर-सा ही हो गया था | घर में आग लगी हुई थी |
एक औरत सभी के घरों पर भाग कर किवाड़ बजाती और कभी सड़क पर जा कर इधर उधर देखती | अजीब सा दृश्य था सोच कर भी रूह काँप जाती हैं | नंबर मेरा भी आया | हमारे रूम की किवाड़ भी बजी | पर तब ही प्रधान की लड़की की बात याद आई , रात को सोना कुछ और नहीं करना | मैंने किवाड़ नहीं खोली और सोने की कोशिश करने लगा |
सुबह हडबडा कर मेरी आँख खुली | दोस्त परेशान बैठा था | मैंने घबराया हुआ था | और वो परेशान | मैंने कहा तुझको क्या हुआ ... मेरे को लगा कि इसने देख लिया मेरी गाड़ी बहार से गायब है | मैंने पूंछा कि क्या हुआ तो बोला कि रात खाना अधिक हो गया मेरे को जाना है और यहाँ पर तो कोई जुगाड नहीं है | खेत में मेरे को जाना नहीं | प्रधान जी के घर चलते हैं मेरे को ड्राइविंग आती नहीं | अब मै परेशान उसको क्या बताऊ | फिर भी अंगडाई सी लेते हुए उठा और किवाड़ खोली | अब फिर होश उड़ गए | ना कोई घर जलने की राख ना कुछ सब कुछ सामान्य | गाड़ी भी वहीँ खड़ी थी आखिर ये हो क्या रहा है | भाग कर गाड़ी के पास पहुंचा और छू कर देखी हाँ ये मेरी ही गाड़ी थी और बिलकुल सही हालत में मेरी हालत कुछ सुधरी पर दोस्त की बिगड़ती जा रही थी | उसको प्रधान जी के ले गए और वहाँ पर जा कर वो फ्रेश हुआ | मै भी वहीँ पर नहाया | आज ट्यूबबेल वाला दौर ना चल सका | प्रधान की लड़की फिर चाय ले कर आई और प्रधान को पास ना देख साथ ही बैठ गयी | वो बोली
"बाबू रात को नींद तो ठीक से आई ना | छाछ कैसा था सुबह का था खट्टा तो नहीं हुआ था ना "
मैंने कहा ,"इस से पूंछो मैंने तो पिया ही नहीं |"
अब उसके चेहरे पर भी पसीने और मेरे तो होश ही फकता थे सुबह से | मैंने कहाँ क्या हुआ तो बोली कुछ नहीं | आप कितने बजे सो जाते हो ? मैंने कहा कि मैं तो रोज ही १ बजे सोता हूँ |
प्रधाननी आ चुकी थी | हम दोनो ने चरण स्पर्श किये और उसी के घर में बोले बोले आइये माँजी कैसे हैं आप ? फिर इधर उधर की बातें हुई और वो बोली की यहाँ पर रात को कभी ना आना | दिन में तो तुम्हारा ही घर है जब चाहो आजाना | उसकी लड़की मुस्करा रही थी | मेरे को तो कुछ समझ आ नहीं रहा था ये मेरे को सेट करने की कोशिश कर रहे हैं क्या ..
मैंने पूंछने को ही था की आखिर बात क्या है रात को ये ड्रामा क्या है घर का अपने आप आ जाना , जल जाना खुद कानो से सुनी थी चीख पुकार और आँखों से देखी घटना थी | सब कुछ ऐसे गायब हो जाना जैसे गधे के सर से सींग | इतने में ही प्रधान जी सेवक के साथ आ गए और बोले कि इनको हमारे बाग में घुमा लाओ | मेरा ध्यान तो प्रधान की लड़की पर था , जाते जाते मैं बस इतना ही सुन पाया , माँजी कह रहीं थी कि तूने छाछ में नींद की दवा मिलाई तो थी पर एक ने पी एक ने नहीं | हम निकल चुके थे | हम अपनी गाड़ी ले कर चल दिए धूप भी ठीक से निकल आई थी | हमने बागों को देखने का विचार टाल दिया | और वापस आने लगे रास्ते में वो स्थान भी पड़ा जहां पर रात गुजारी थी | मै देख रहा था कि शीशे में मेरे को वो चेहरा दिखाई दिया | बहुत तेजी के साथ मै चला गया | और रास्ते में दोस्त को रात की बात बताई | उसने कहा कि मै उठा क्यों नहीं ?? तब मेरे को छाछ में नींद की दवा का राज खुलता-सा नज़र आया | हम सोते रहें रात भर और कोई दुखिया चिल्लाती रहे रात भर | पर वो थी कौन और ये ड्रामा था क्या ?
बहुत दिमाग मार लिया पर कुछ ना सूचा | एक और भाई नीरज वैसे तो साथ का ही था पर मेरे से अधिक जानता था | इस विषय में तो उस से पूंछा तो वो बोला या तो ये सपना है और अगर वही तुमने फिर से सुबह देखी है थी तो ये बहुत अधिक अशुभ स्थान है | मेरे को वो घटना देखनी है | मैंने मजाक में कहा कि पागल है अब तेरे लिये फिर उस घर को जलवायें जो कहीं है ही नहीं | वो बोला तू चुप कर तेरे को कुछ नहीं पता | मैंने कहाँ हाँ तांत्रिक बाबा तुमको ही सब कुछ पता है | और हम सब हंस दिये | पर ये भी सच था कि मीर पुर नाम से भी दहशत सी लगने लगी अब तो हम को |
पर क्या करें क्या ना करें ये कैसी मुश्किल हाय ..........
मै , नीरज और अंकित चल दिए एक बार फिर मीर पुर गुप चुप तरीके से |
पर इस बार नीरज के आदेशानुसार ही सब होना था | सब से पहले पहुंचे पुलिस स्टेशन | और वहाँ पर जा कर जानकारी लेनी चाही कि आखिर माजरा क्या है तो फिर वही राग कि हमने नहीं बताना कुछ | मैंने कहा कि हम खुद से देख लें फाइल |तो ना जाने क्यों वो मान गया | और नीरज ने कहा की जिस में जलने का केस हो वो सारी फाइल उठालो | फाइल उठा ली और कुछ देर पढ़ने के बाद वो फ़ाइल मिल ही गयी जो थी उस केस से मिलती हुई | इस के बारे में जानना चाह तो वो बोला कि खुद ही देखो शहरी बाबू हम कुछ नहीं बताएँगे | हमारी जान हमको प्यारी है |
फ़ाइल में कुछ ऐसा था :
राग कुमार और पुत्र राज कुमार पत्नि प्रभा देवी नाम है | आग लगने से घर में आदमी और बच्चे की मौत उसकी पत्नी की भी जल कर मौत | पोस्टमार्टम के बाद फाइल बंद |
हम सब लौट चले | अब लगभग सब कुछ साफ़ हो चुका था |
ये ही सब कुछ सारी रातों को चलता होगा | और यही कारण था कि वहाँ पर रात को रुकने को मना किया जाता था | मै रुका और मैंने देखा कि ड्रामा क्या है |
ठीक है हम रात में आयेंगे ऐसा नीरज बोला | मैंने कहा पागल है तू | तेरे को तो कुछ बताना ही पागलपन है | साला प्रेत-साइको | हंस रहे थे हम और साथ में डर भी था जहन में | जो होगा देखा जायगा | पूरी पूजा पाठ और जो जो मन्त्र सिद्ध किये हुए थे ९ बजे के बाद एक एक माला फेर कर | अपने ताबीज पहन कर पूरी सात्विक तयारी से रात को १०.३० पर हम निकले और ११ बजे के आस पास पहुँच गए मीर पुर सीमा में | जहां पर रात को जाना था निषेध | और अंदर घुसे तो वही नजारा | घर जल रहा है औरत बिलख रही है | चिल्ला रही है बचाओ बचाओ | मेरे पति और बच्चा अंदर है बचाओ | कभी पानी डालती है तो कभी दूसरों के घरों को पीटती है |
और कुछ देर बाद चिल्लाते चिल्लाते गाड़ी के पास आई और बोली बाउजी मेरे बच्चे पति और मेरे को बचा लो | और भागती हुई उसी घर में चली गयी जल कर राख हो गयी | हमारे होश फकता हो गए | मैंने तो फिर से पिक्चर देख ली इस बार पूरी देखी थी | गाड़ी मोड ली और नीरज के घर ही रात गुजारने का फैसला किया | और पूरी रात बातें की कि है क्या और हम कर क्या सकते हैं |
इतना तो पता चल ही गया था कि ये वियोग में है | और बाकी सारा फाइल और जिवंत दृश्याण सब कुछ साफ़ कर चुकी थी | एक बार फिर से हम प्रधान के पास गए इसी बात को ले कर और हमारे साथ नीरज भी था | उस से बातें शुरू की ही थी की उसने हमको डाट दिया | तुम लड़को को और कुछ काम नहीं | फिर नीरज बोला हम को सब पता है वो आग वो घर प्रभा देवी राज राग सब कुछ | अब तो प्रधान शांत हो गए और डरे सहमे से बोले चाहते क्या हो कितना चाहते हो ? मेरे को कुछ गडबड लगी जैसे इसी की कुछ गलती हो और रिश्वत दे कर बचना चाहता है पर नीरज बोला की हम पूजा करेंगे | जिस से ये समस्या सदैव के लिये समाप्त हो जाएगी | मेरे को बाहर प्रधान की लड़की दिखी मै बाहर मिलने चला गया |
कुछ देर बाद हम तीनों गाड़ी में थे | मैंने कहा की क्या हुआ ? तो नीरज बोला कि हो गया जो होना था | पूजन होगा और सब कुछ अच्छा होजाएगा और तू कैसे प्रधान की लड़की के साथ लगा हुआ है तो मैंने कहा बेटा इस बार तो मै नंबर भी ले आया मेरी जान |
दशहरा पास था | सोचा यही दिन बहुत अच्छा है पूजा के लिये | वहाँ गए और विधि विधान से पूजा अर्चना के लिये स्थान को शुद्ध करने लगे पर ये क्या .. सारा कुछ उल्टा हो रहा था | कुछ भी ठीक नहीं | हमको वापस आना पड़ा | एक दिन मै प्रधान की लड़की से बातें कर रहा था | वो कह रही थी कि माँ को पता है हम बातें करते हैं | बातों-बातों में उसने कहा कि क्या तुमने सच में उस रात छाछ नहीं पी थी | मैंने कहा कि नहीं और एक भयानक किस्सा है उस रात का | वो बोली कि मेरे को तुम से मिलना है | मै शहर आउंगी अपनी फीस जमा करवाने तुम करवा देना और हम इतने समय बातें कर लेंगे | मेरे को क्या परेशानी हो सकती थी | अगले दिन ही वो आ गयी |काम होने पर वो बोली तुमसे कुछ बातें बतानी है |
मैंने कहा बोलो यार तो वो बोली कि यार हमारा गाँव शापित है और वही कहानी बताने लगी जो मै दो बार देख चुका था | उसने बताया कि रात में होता है ये सब सबको दिखता है मैंने तुम्हारी खाने के साथ छाछ में नींद की दवा मिलाई थी जिस से तुम सो जाओ और तुम को कुछ पता ना चले | मै मन ही मन सोच रहा था कि इस बात को ले कर इस के बाप से भी मिल आये इसको कुछ पता ही नहीं | उसने आगे कहा कि इस में कुसूर मेरे बाप का है | उसने ही घर में आग लगाई थी | नकली कागज बना वो करोडो का मालिक हो गया है | हाई वे पर जमीन आ गयी है तो वो अरबों में पहुंचेगी | वो आदमी मेरा चाचा है | और वो औरत मेरी चाची |वो बच्चा मेरा चचेरा भाई है और कहते कहते सीने से चिपक कर रो पड़ी | मैंने उसको सांत्वना दी | और कहा सब कुछ ठीक हो जाएगा |
नीरज अंकित को सारी बातें बताई | नीरज ने कहा अब तो काम हो जाएगा | उसने कहा कि हम उसको बुलाएँगे और उस से कहेंगे कि वो चली जाय | अंकित बोला हाँ तेरी दासी है वो कहा तो चली जाएगी | हा हा हा .. हम सब हंस दिए क्योंकि हमको पता था करना क्या है |
दीपावली की रात को हमने पूजा करने का निश्चय किया | और रात ९ बजे तक सब कुछ तैयारी हो चुकी थी | वहाँ पर उस स्थान और उस मंदिर के पास में प्रधान के गेस्ट रूम के बहार चबूतरे पर हमने सारा कुछ प्रबंध किया था | शुद्ध किया , मन्त्र यंत्र साधना शक्ति पुंज आदि | प्रधान जी भी बैठे थे | प्रसिद्द मंदिर से ज्योत ले कर आये तथा आशीर्वाद लाए जिस से कि कार्य में सफलता मिले | फिर वही किस्सा शुरू हुआ और वो दरवाजे पीटते सीधे प्रधान के पास आई कि भाई साहब बचा लो मेरे इन को | ये आग आपने ही लगाई थी एक बार यूँ ही कहा होता आपको भला हम अपना सब कुछ क्यों ना देते | आखिर आप अपने हो | मैंने आज तक किसी का बुरा नहीं किया है मेरे साथ इतना बुरा क्यों ? वो बस माफ़ी ही मांग रहे थे | नीरज बोला तू मेरे से बातें कर | इससे क्या बात कर रही है | तो वो बोली मेरे पति घर में हैं और बच्चा भी घर में हैं इन को बचा लो | तो अंकित बोला एक शर्त है अगर तू मानती है तो हम तुझको राज और राग दोनों को स्थान देंगे | वो बोली कि मै कैसे मान लूं | जब अपने भी धोका देते हैं |
गुस्से की आग भड़क चुकी थी | उस दिन प्रधान मरता | प्रधान की सजा को क्यों दे रही है ? उस से कहा कि इसकी सजा ऊपर वाले ने लिख रखी है पुलिस को सारा केस पता है कार्यवाही होगी इसको इसके कर्मो की सजा होगी | वो गलती से कीले हुए इलाके में आ गयी थी जो प्रभावी कर दिया था | वो चाह कर भी कुछ भी नहीं कर पा रही थी | नहीं मानती तो वहीँ बंध कर रह जाती | प्रधान ने बहुत क्षमा याचना की विवश हो बोली मै तैयार हूँ पर शर्त बताओ | शर्त बताई गयी कि तू किसी को परेशान नहीं करेगी | तेरे को पूरे गाँव की रक्षा करनी होगी | तो वो मान गयी | वहीँ पर सड़क के किनारे ईंटो का एक छोटा-सा इंटो से एक घर बनाया और कहा कि राग , राज और तू अपना समय यहाँ पर व्यतीत करोगे | समय पूरा होने पर इस मृत्यु लोक से चले जाओगे | वो मान गयी | उसने कहा कि मेरा घर जलाया गया था | जो मेरे इस घर पर पानी अर्पण करेगा मै उसकी सहायता अवश्य करूंगी |
और इस तरह फाइलें फिर खुलवाई | प्रधान जी के कारण सारा गाँव दहशत में था | रुतबे के कारण कोई कुछ नहीं कहता | सभी का कष्ट समाप्त हुआ | सारे गाँव में खुश हाली आ गयी | प्रधान जी अभी अंदर है और वो पानी वाली माता नाम से प्रसिद्द हो गयी | दूर दूर से लोग आते थे | पर एक बात मेरे समझ में आज तक भी नहीं आई | वो आइसक्रीम पार्लर वाला कौन था जो उस गाँव का था पर गाँव तो हम भी गए थे वहाँ पर भी कोई भी उसको नहीं जानता था | सारा किस्सा ही उसकी वजह से शुरू हुआ | ना वो कुछ कहता ना हम जाते |
| समाप्त |
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