अधिक पढ़ा लिखा न होने के कारण कुञ्ज एक फेक्ट्री में अमानी ( प्रतिदिन मजदूरी ) पर कार्य करता था | सोभाग्य से उसकी पत्नी १२ पास थी तथा बच्चों को भी पढ़ने के लिए प्रयासरत थी |
एक दिन कुञ्ज तथा कुञ्ज की पत्नी मीरा शादी में गये हुए थे | आखिर कुञ्ज की बहिन की बेटी की शादी थी |
मिलनी का समय आया तो कुञ्ज अभिमान वश बोला कि १०० - १०० रुपये से मिलनी करते हैं | इतने में मीरा ने कहा कि इतने लोग हैं यदि ५००० से ज्यादा खर्च किये तो घर पहुँचने के लिए किराये के लिए भी नहीं हैं | एक लंबी आह उसके भीतर आग की लपट की तरह फिर गई पर उधर देखा तो कुञ्ज १०० - १०० रुपये से मिलनी कर रहा था |
शादी प्रसन्नता के साथ हो गयी लेकिन शादी के बाद मीरा तथा उसके बच्चे रेलवे स्टेशन पर बैठे थे और कुञ्ज पास ही एक नए बनते घर के पास से ईट उठता हुआ छत की ओर जा रहा था |
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