पोशाकों की महिमा ,
ये एक अजब कहानी है |
हर सुबह के बाद आती ,
वो एक शाम सुहानी है ||
नित-नयी पोशाक बदल,
आते - जाते हैं मौसम |
फूल कहॉ जाते हैं जब ,
आता है पतझड़ का मौसम ||
और रिमझिम के आते ही ,
नभ हो जाता यूं काला |
मानो पहनी है धरती ने ,
पोशाक और मोती-माला ||
है शरद पूनम की है रात ,
पूर्ण हो गया चन्द्र विकास |
बिखरती है चान्दिनी एसे ,
जैसे हो धरती की पोशाक ||
पोशाकों की महिमा ,
ये एक अजब कहानी है |
हर सुबह के बाद आती ,
वो एक शाम सुहानी है ||
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