नास्तिक

भगत जी गाँव के चमत्कारी मनोकामना पूरी करने वाले बड़े मंदिर के मुख्य पुजारी हैं |

एक दिन खेत पर जा रहे राजेंदर को भगत जी ने रोका और बोले ,"ओऐ राजेंदर ! अयोध्या से स्वामी जी आये हैं ...  कथा तथा प्रवचन करने के लिए | सभी वहां जा रहे हैं | क्यों तू नहीं जा रहा क्या वहां ?"

राजेंदर ने कहा कि मेरे को खेत पर बहुत सा काम है |

इस पर चुटकी लेते हुए भगत जी ने कहा की तू नास्तिक का नास्तिक ही रहेगा |

राजेन्द्र ने कहा कि आस्तिक क्या देशी घी चुराने , चांदी - पीतल का सामान बेचने , मन्दिर में वी. आई.पी. दर्शन करा कर रिश्वत लेने से और समाज के सभी का मूर्ख बनाने ही से होते हैं | तो मैं नास्तिक ही सही हूँ |
स्वामी जी यही तो कहेंगे कि ईश्वर भक्ति में ध्यान लगाओ तो भक्ति में ध्यान लगाने की जरूरत आपको अधिक है |
मेरा कर्म ही मेरी पूजा है |

यह कह कर वो अपने खेत की ओर चल दिया |

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