गुफ़्तगू : राज़ की बातें

नजारा  :- 

आप गुज़रे थे ,उस सडक से ,
रास्ता तय करने के लिए अपना ||
देखा आप को,यकीन नहीं हुआ ,
पर करना पड़ा  कुदरत पर यकीन  ||१||

उनकी ख़ामोशी  :-

खामोश थी, कुछ इस कदर तब वो ,
उनकी ख़ामोशी में , अजीब सी बात होती है || 
जुबां से कुछ बोला नहीं उन्होंने तब तो  ,
पर देखो  तो , फिर  भी मुलाकात  होती है ||२||

इंतज़ार  :- 

किया था इंतज़ार , उस दिन मैंने बहुत था ,
आज दर्द में दर्द की , तलाश बहुत है ||
अब काज़ल इन आँखों में , लगाऊ कैसे में ,
लोगों  ने इन आँखों को , रुलाया बहुत है  ||३||

ख्याल :- 

में नहीं जानता , कितना संजीदा है  ,
आप इस लश्कर-ए-महफिल में ||
मेरे हाथों से होगी , बस हिफ़ाज़त आपकी , 
ना जाने ऐसा-ख्याल , क्यों आता है मुझे ||४ |  

तमन्ना  :- 

"अब जान चुकी हूँ में  ,खुशी आपकी किस से है," 
और वो बोली हम से ,"ख्वाइश  क्या है आप की ?"
"आप देखो तो ज़रा दुनिया ,कुछ पल हमारी नजरों से
तमन्ना तो हमारी  बस इतनी छोटी-सी है " ||५ || 


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