दीपावली का समय था | सभी को फोन करते करते मै बोर-सा हो रहा था तो फेसबुक लोग इन करके बैठ गया |वहाँ भी वही सभी को सन्देश ही भेज रहा था कि तभी मेरे को एक मित्र के स्टेट्स पर एक कमेन्ट दिखा | अर्ची (अर्चना) नाम था उस का | मैंने उस आई डी को खोला और हिन्दी में एक सन्देश प्रेषित कर दिया , "आपको तथा आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें |"
प्रतिउत्तर प्राप्त हुआ "अरे वाह ... हिन्दी में . आपको भी शुभकामनायें" |फिर मैंने कहा बात करना चाहोगे ?? तब प्रतिउत्तर आया "हांजी" |
एक दो दिन बातें हुई और मैंने उसको अपनी मित्र सूची में जोड़ लिया | उसने मेरी रूचि जाननी चाही तो मैंने सभी के साथ ये भी बताया कि मै लेखक , वेव डिजाइनर तथा चित्रकार भी हूँ | प्रारंभ में तो इसे ही कुछ इधर-उधर की बातें होती रहीं | मेरे को उसने बताया कि परिवार में वो अपनी माँ के साथ तीन बहने हैं |
अर्चना जिसके नाना जी आर्मी में कर्नल की पोस्ट पर थे | उनकी शादी हुई तथा उनके दो बच्चे हुए | एक लड़का और एक लड़की | दो बच्चों को छोड कर्नल जी की पत्नी का स्वर्गवास हो गया | कर्नल जी की पोस्टिंग बोग पुरिया में हुई थी | उनको वहां पर एक लड़की लड़की पसंद आई | उन का एक भाई भी था | रिश्ते की बातें हुई और कर्नल जी का दूसरा विवाह हो गया | फिर कर्नल जी अपनी पत्नी के साथ जम्मू आ गये |
उनके तीन बच्चे हुए , मुन्नी , मनीषा और काका | मुन्नी सब से बड़ी थी | मनीषा उस से छोटी और काका सब से छोटा |
मुन्नी की शादी जल्दी हो गयी और घर का सारा कार्यभार मनीषा के कन्धों पर आ गया | काका अभी छोटा था | कर्नल जी के घर एक मंदिर बना हुआ था | जिस में गाव के लोग भी पूजा करने आते थे |
एक दिन मनोहर नाम के एक व्यक्ति भी मंदिर आये | वो आर्मी से ही सम्बन्ध रखते था | छुट्टी चल रही थी | वो अपने बड़े भाई के घर आये हुए थे | उनको मनीषा बहुत पसंद आई | घर बात-चीत हुई | रिश्ते की बातें चली | मनोहर मनीषा से १० साल बड़े थे | शादी के दिन मुन्नी ने मनीषा से कहा कि मनीषा तू भाग जा | ये लड़का तेरे लायक नहीं है और तू है ही कितनी बड़ी अभी और ना तेरी उम्र हुई है | पर मनीषा ने मुन्नी की एक ना सुनी और पिता जी ने जैसा कहा था और १६ साल की छोटी उम्र में मनीषा की शादी हो गयी |ऑटो में डोली विदा कर दी गयी |
घर पहुँचते ही ताने बाजी शुरू हो गयी | मनीषा के लंबे बालों को देख कर मनोहर के पिता ने ताना मारा इसके बाल में तो आधा किलो तेल लग जायेगा | और इसी तरह किसी तरह उनकी जिंदगी काटने लगी |
२ साल बाद उनके घर एक बेटी ने जन्म लिया | उसका नाम आराधना रखा | मनोहर तो तटस्थ थे पर मनोहर के पिता जी ने उनको ना जाने क्या क्या उल्टा सीधा कहकर भड़का दिया कि तेरी लड़की हुई है और मनोहर कि माँ का भी इस काम में पूरा सहयोग था |
कुछ दिन भी नहीं हुए थे मनोहर की माँ ने मनीषा को घर का काम करने के लिया दबाब डाला | मनीषा दूध गर्म कर रही थी करीब ५ , ६ लीटर रहा होगा | छोटी बच्ची आराधना गोदी में थी | अपनी माँ के भडकाने पर उबलता हुआ दूध मनोहर ने मनीषा पर गिरा दिया | मनीषा बुरी तरह जल गयी |साथ में छोटी बच्ची आराधना भी | फिर जम्मू सरकारी अस्पताल में मनीषा को भर्ती कराया |
आराधना बहुत छोटी थी | माँ के दूध के सिवा वो कहाँ कुछ पी सकती थी और जली हुई भी थी | उसको बोतल से दूध पिलाने की व्यवस्था की गयी |मनोहर के तीनों भाई हमेशा से मनीषा के साथ आये दिन बदतमीजी किया करते थे | आखिर माँ की सह जो थी उनको |
२ - ३ महीनो के बाद मनीषा अपने गांव वापस चली गयी | मनीषा अपने पिता के घर जम्मू आ चुकी थी | मनोहर मनीषा से मिलने आये | तब तक पता चल चुका था कि मनोहर की ये दूसरी शादी थी | पहली पत्नी तो इसे व्यव्हार से उसको छोड कर कब की जा चुकी थी |
गर्मिया थीं रात का समय था | मनीषा आराधना के साथ छत पर सो रही थी | किनारे पर थे |मनोहर ने आराधना समेत मनीषा को छत से नीचे गिरा दिया | और फिर वही अस्पताल के चक्कर |
बहुत ही दुविधा की स्थिति थी | जम्मू में मनीषा के पिता बोलते कि तू ससुराल क्यों नहीं जाती | जब वहाँ पर जाती तो कमरे में अकेला देख मनोहर का छोटा भाई आ जाता | मनोहर की माँ ने जो कह रखा था कि देवर और भाभी का रिश्ता ही न्यारा होता है |
पर मनीषा ने हिम्मत से काम लिया मनोहर का भाई जरूर कुछ ना कुछ करने की कोशिश करता रहता | एक बार तो बचाव के लिए चिल्ला कर पूरे गाव को बुला लिया | पर कब तक चलता ये सब मनीषा जम्मू अपनी माँ के घर चली गयी |
मनीषा की माँ का परिवार सामान्य से कुछ नीचे था तथा मनोहर का था कुछ धनाड्य |
मनोहर की हर तीन महीने में छुट्टी होती थी | मनीषा तो गाँव गयी हुई थी और घर पर मनोहर की दादी में बोला कि तेरी बीबी घर छोड कर भाग गयी है | मनोहर जब मनीषा के घर जाता है | तो वहाँ पर मनीषा होती है | मनीषा ने मनोहर से कहा कि अब वो जम्मू ही रहेगी तो मनोहर मान गया | कुछ दिन बाद अर्चना का जन्म हुआ | और अर्चना आराधना से दो साल छोटी थी |
और इस बात का भी बहुत दुःख हुआ मनोहर को | वो अर्चना के जन्म पर बेकार हुए केले ले कर आया | फिर तो बहुत ही अधिक अत्याचार होने लगे | जब भी मनोहर को गुस्सा आता तो वो जिस चारपाई पर सो रहा होता तो उस चारपाई के पाए के नीचे मनीषा का हाथ रख देता |
कुछ समय बाद मनीषा की माँ का स्वर्गवास हो गया | पिता और भाई रह गए | लोगो के ताने सुन सुन कर मनीषा को उन्होंने घर से बाहर निकल दिया | फिर मनीषा ने एक ब्रेड फेक्ट्री में काम करना शुरू किया और किराये पर रहने लगी |
कहते हैं ना सभी को कभी ना कभी सद्बुद्धि आती है | मनोहर सोचने समझने के लायक हो गया | समझ आ चुका था कि मनीषा के साथ किया गया कार्य अशोभनीय है | पछतावा हुआ और मनीषा के साथ बहुत अच्छे से रहने लगा |
फिर दो साल के बाद मनीषा गर्भवती थी वो घर अकेली थी | उस समय घर के पास में कोई सम्बन्धी रहते थे | जिनको मनीषा मोसी बोलती थी | उन्होंने मनीषा की बहुत सहायता की और मनीषा को सात महीने में ही एक बेटी हुई | उसका नाम प्यारी रख दिया | और इस के बाद मनीषा की बच्चे दानी में इन्फेक्शन हो गया | डॉक्टर ने बोला कि जल्दी ही ऑपरेशन करना होगा | और मनोहर के मनीषा के आचे व्यवहार से मनोहर की दादी को बहुत परेशानी होने लगी थी |
मनोहर की माँ ने सभी में फैला दिया कि मनोहर पागल हो चुका है और जबजस्ती उसको पागलों के अस्पताल में डलवा दिया गया | बहुत समय मनोहर ने पागलों की जिन्दगी गुज़री फिर मनीषा ने बहुत कोशिशें की और मनोहर को अस्पताल से बाहर निकलवाया और मनोहर की माँ और पिता मनोहर को घर वापस ले गए |
जिस दिन मनीषा का ऑपरेशन था उस दिन किसी में खेत की मेड पर जहां पर पानी जमा होता है वहाँ पर एक शव मिला | पहचान करने पर पता चला कि किसी ने मनोहर का मर्डर कर दिया था |
जब मनीषा को पता चला की मनोहर अब इस दुनिया में नहीं है मनीषा सदमे में बिस्तर से गिर गयी और टांके खुल गए | तुरंत टांके लगाये गए पर व्यवस्था कोई इतनी अच्छी नहीं थी अस्पताल की | लापरवाही इतनी कि पेट में कैंची रह गयी | १० दिन बाद फिर ऑपरेशन था |
मनीषा आई सी यू में थी उसने अपने छोटे भाई काका से बोला कि आराधना को मनोहर के आखिरी दर्शन कराआ | और कुछ रुपये दिए | पर काका वहाँ गया नहीं उसने ने रुपये अय्याशी में उडा दिए और आराधना को घुमा लाया |
पर ईश्वर कब तक अनदेखा करता | काका का एक सेवक था , मेला राम | उसने मनीषा की सहायता की | ऑपरेशन के लिए रूपये चाहिए थे और वो थे नहीं | मनीषा ने सेवक से कह कर अपने गहने बिकवा दिए |ऑपरेशन तो हो गया पर डॉक्टर ने कहा कि मनीषा को किसी ठंडी जगह पर रहना पडेगा वर्ना उसकी जान को खतरा है |
सेवक ने बताया कि वो कश्तवाद नमक स्थान से संबंध रखता है | इसी बीच सेवक को काक ने नौकरी से निकल दिया | मनीषा कुछ दिन जम्मू उस किराये के घर में रही | उस समय हालत इतनी नाजुक थी कि वो उठकर कहीं जा भी नहीं सकती थी | घर में कोई नहीं था | आराधन ने इतनी छोटी उम्र में चावल बनाये पर उसमे सर्फ़ गिर गया | माकन मालकिन एक अच्छी महिला थीं | उन्होंने अपने घर से खाना दिया और प्यारी को दूध भी |
फिर एक दन उन्होंने मनीषा से कहा कि तूम्हारा कोई सम्बन्धी हो तो बुला लो और फिर मुन्नी को फोन किया गया | और मुन्नी तथा उसका बेटा घर आये | मुन्नी ने कहा कि उसका बेटा किशोर उसके घर रह लेगा | पर हर महीने उसको ५०० रुपये चाहिए | साथ में किशोर को पढ़ाना भी पड़ेगा | मनीषा मान गयी | किशोर की आयु १५- १६ साल की रही होगी | फिर किशोर रहा मनीषा के घर |थोड़े बहुत रुपये थे जो थे मनोहर के खाते में वो सब कुछ जाने लगा |
फिर ऐसे ही ३ महीने पूरे हो गए | टांके खुलने थे वो खुलवा लिए गए | डॉक्टर ने फिर ठन्डे स्थान पर जाने की सलाह दी | सेवक को बुलाया और किश्तबाद जाने की तैयारी करने लगे | बस स्टैंड पर सब खड़े थे पर मुन्नी का लड़का साथ जाने से मना करने लगा | और उसने शर्त रख दी , बोला कि अगर मेरे को १०० रुपये रोज देती रहोगी तब ही मै चलूँगा |
मनीषा परेशान हो गयी | फिर भी ना जाने क्या सोच कर वो राजी हो गयी और कहा कि ठीक है | कुछ दिन होटल में रहे और जब पता चला कि मनीषा के पास रूपये खतम होने को हैं तो किशोर वहाँ से भाग गया |
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