घनी जुल्फें

यूं घूंघट से ना देखो आप हमको इस कदर ...
नहीं तो ये दीवानगी लाख गुनाबढ़ जाएगी ||

हमको मारने के लिए अब मुस्काना क्यों ?
ये कातिल निगाहें हमारा कत्ल कर जायेंगी ||



हो जाती है काली घटाएं इस आकाश में ऊपर..
जब जाती है ये घनी जुल्फें इन आँखों के ऊपर ||

और कुछ इस तरह लगता है आपके गले का हार ..
जैसे बरसात के बाद आती है एक सतरंगी फुहार ||

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