आपसे

तुम हंसती थी तो लगता था ,
 ये बसंत यूं , तब आती थी |
अब तुम बिन सच मुझको ये,
 मौसम पतझड़ जैसा लगता है ||

यही प्यार है या हमारी ,
दिल लगी है आपसे |
लगाना दिल से दिल ये ,
छोटी-सी चाहत है आपसे ||

ये सूरज ने चमकना , 
क्या सीखा है आपसे |
बस यही छोटा-सा ,
एक सवाल है आपसे || 


No comments:

Post a Comment