वो खड़ी हैँ उस किनारे पर ,
और कह रही है . . . . .
तुम अभी कुछ दूर हो मेरे से ।
अभी तुम्हारे और क़रीब आ नहीँ सकती मैँ ।।
हैरत की बात तो ये है यारो ! ! ! ! ! !! ! !!
शायद वो जानते नहीँ ,
मै उन के इतना करीब खड़ा हूँ ,
जितना मै खुद के क़रीब नहीँ || ||
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