ये दिल

मै नहीँ जानता प्यार करना ---
गुनाह है या नेकी ||
ना मै कहता रिश्ते यूं ---
पल मेँ बनजाया करते है ||1||

जो दिल करता है --- 
करना चाहिए दिल से ||
मेरा तो कहना ---
बस इतना छोटा सा है  ||2||

यूं तो ज़िन्दगी साथ में ,
बस जी ही रहे हैँ हम ||
बस मिल जाये साथ आपका ,
तो बात ही कुछ और हो . . . . ||3|


प्यार तो बहुत है उनको भी ,
उस प्यार को हम बताऐँ भी तो कैसे ??
 जानते है डर है बहुत उनको भी , 
बस लगता है कुछ लगता है मुझको  ||4|| 


नयी बात यह नहीँ कि उनका दूर होना ,
तय है इस लश्कर-ए-महफिल से ||
नयी बात तो है ना जाने क्योँ वो  ,
वो इस हकीकत को दिल से लगाए बैठे हैँ ||5||


हम क्या चाहते है जरुरी ये नहीँ ,
जरुरी है वो हम से क्या चाहता है ||
पर ये बात क्या सोचने वाला  ...
क्या एक अकेला बस मै ही हूँ ||6||


जानता हूँ साथ हो मेरे तुम ,
कहने को तो अकेला हूँ मै ||
यकीन है इतना साथ हो तुम तो ,
पानी से दिया जला सकता हूँ मै ||7||



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